Karnpisachini Brahmarakshah aur भूत से काम करवाता हूँ Rudranath Horror

Karnpisachini Brahmarakshah aur

Karnpisachini Brahmarakshah aur आपका कभी आमनासामना हुआ है किसी कर्ण पिशाचनी से? जब तक आप उसे किसी कार्य में नहीं लगाओगे, वो आपके कंधे पर बैठकर फुसफुसाती रहेगी। हमने इनके दर्शन जरूर करे थे। वो पूरा रक्त में सना रहता था। मतलब उसे देख के भी हम भी कई बार कहते थे इतना भयंकर महाराज जी कहां ले चलते रहते हैं उसे।

कई लोग कहते हैं कि बागेश्वर धाम के पास कर्ण पिशाच नहीं है। जहां हनुमान जी की सेवा होती है। वहां पिशाच क्या करेगा? वहां वो हनुमान जी की सेवा करेगा। वो कुछ और नहीं कर सकता। एक लड़का था 27 28 साल का। YouTube पे साधना देखी और बैठ गया। रात्रि में 11:00 बजे के बाद सरसों के तेल का दिया लगाना तो चीजें उसे दिखने लग गई। इतना परेशान हो गया कि साधना करते हुए अपना देह भी त्याग देते थे। गलत Karnpisachini Brahmarakshah aur

मेहंदीपुर बालाजी के प्रसाद को अगर घर लाए तो प्रसाद में प्रेत आपके साथ घर आ जाएगा। पहले के समय में प्रसाद लाना मना ही था।

अभी भी वैसे नहीं लाते हैं वो। नहीं लाने हैं।

शव के ऊपर बैठकर वो साधना होती है। क्या सच में शव खड़ा हो जाता है? साधना के समय?

उसके ऊपर मंत्र जाप किए जाते हैं तो एक समय ऐसा आता है वो बैठ जाता है। मंत्रों में इतनी ताकत है कि वो ब्रह्मांड को भी रोक सके। Karnpisachini Brahmarakshah aur

कोई रियल एक्सपीरियंस बताएंगे जिसमें हनुमान जी वर्सेस कोई डार्क एंटिटी हो।

एक जगह गए थे हम वहां पे डार्क एंटिटी बहुत डार्क थी। तो तब हमने बजरंग बाण का प्रयोग किया। जब वो निकला है तब उसने मुंह खोला है कि मैं वचन तोड़ता हूं और मैं जाऊंगा रास्ता बता रहा हूं।

मुस्लिम एंटिटी है जिन बोलते हैं। आपने देखा है कभी इन एंटिटीज को सर?

आपको इन्हें देखना है तो मैं रास्ता भी बता देता हूं। कोई मस्जिद हो, पुरानी हो, टूटी हुई हो।

दोस्तों, शास्त्रों में कहा गया है कि पितृ पक्ष पितरों को याद करने, उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने के लिए सबसे पवित्र समय है। कहा जाता है कि इसका सबसे पहला और सबसे आखिरी दिन विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर श्री मंदिर, पितृदोष निवारण महापूजा करवा रहा है। एक साथ पांच पवित्र स्थलों पर गोकर्ण, गंगा घाट, रामेश्वरम, पिशाच मोचन कुंड और काशी गंगा आरती। इसके अलावा पितृ पक्ष के किसी भी दिन आप काशी, गया, रामेश्वरम, गोकर्ण जैसे तीर्थ स्थलों पर पितृ शांति पूजा, नारायण बलि, नागबलि और तिल तर्पण करवा सकते हैं। माना जाता है कि इन अनुष्ठानों से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वंशजों को सुख शांति का आशीर्वाद मिलता है। इस पितृ पक्ष आप अपने पितरों को श्रद्धा समर्पित कीजिए।

हेलो सर। वेलकम टू द पडकास्ट। कैसे हैं सर आप?

मैं अच्छा हूं। जय भगवती जय। जय भगवती जय गुरुदेव

Business Growth by Rudranath Ji

जय गुरुदेव सर आज हम काफी सारे टॉपिक्स पर बात करने वाले हैं लेकिन स्टार्टिंग मैं करना चाहती हूं थर्ड आई से जब भी कोई इंसान स्पिरिचुअलिटी में आता है स्पिरिचुअलिटी की बात करता है एक गोल रहता ही है कि मुझे ना अपनी थर्ड आई ओपन करनी है सर आप बताएंगे कि थर्ड आई ओपन कैसे कर सकता है कोई इंसान और अगर कर ली तो उससे क्या होगा?

सबसे पहले तो यह बात समझो कि हमारे शरीर में चक्र कितने हैं? सप्तचक्र का शरीर है यह। ठीक है। मूलाधार स्वाधिष्ठान मणिपुरा अनाहता ठीक है। उसके बाद विशुद्धि फिर थर्ड आई आता है और फिर सहस्त्र चक्र आता है। सात चक्र हो गए। जब तक आप बेस से शुरू नहीं करोगे आप डायरेक्ट थर्ड आई पे जाओगे तो वो कहीं ना कहीं आपको इफेक्ट करेगा। गुड परिणाम की जगह बैड परिणाम आने लगेंगे। आप उसकी ऊर्जा झेल नहीं सकते हो। आपको विज़ंस अगर दिखने लग गए, आप समझ ही नहीं पा रहे हो यह दिख क्यों रहा है। ठीक है? वो कहीं ना कहीं फिर आपके माइंड पे ज्यादा असर डालेगा। हम ठीक है? तो पहले उन्हें बेसिक करने चाहिए। Karnpisachini Brahmarakshah aur

अपने बेसिक चेक जो मूलाधार है मूलाधार पे काम करें। फिर स्वाधिष्ठान पे काम करें। फिर मणिपुरा पे काम करें। फिर अनाहत पे काम करें। फिर विशुद्धि पे काम करें। उसके बाद अपना थर्ड आई पे और सहरस्त्र पे काम करें। हम डायरेक्ट आप देखिए आपने पहली सीढ़ी पे पैर नहीं रखा और आप सीधा सातवीं छठी सीढ़ी पे पैर रख रहे हो तो उसका इफेक्ट कैसा होगा? तो यह चीज जानना बहुत जरूरी है और थर्ड आई एक्टिवेट होने के बाद जिनकी एक्टिवेशन हो जाती है थर्ड आई ठीक है वो इस लोक से परे देख सकते हैं हम हर एक चीज का अपना देखो हमारा मृत्यु लोक है ठीक है Karnpisachini Brahmarakshah aur

इस प्रकार अपने दूसरे ग्रह चले जाओ नवग्रह हैं जो उनके अपने-अपने रूल्स हैं है ना प्लनेट्स के भी केतु अपना अलग फल देता है शनि अपना अलग फल देता है ठीक है ऐसे ही पाताल लोक का अपना नियम है स्वर्ग स्वर्ग लोक का अपना नियम है। शिवलोक का अपना नियम है। ऐसे ही ये जो दूसरी दुनिया है हमारे बीच में इनका अपना अलग नियम है।

हम तो अगर थर्ड आई ओपन कर ली है तो क्या वो जितनी एंटिटीज हैं जिनको हम नॉर्मल आई से नहीं देख सकते उस उनसे वो कनेक्ट करने लग जाएगा इंसान। Karnpisachini Brahmarakshah aur

उससे बहुत ज्यादा हो जाता है। थर्ड आई एक्टिवेशन का अर्थ होता है कि आप अपने भूत को भी देखने में संभव हो जाते हैं। वर्तमान को भी आप समझने लग जाते हैं और भविष्य आपको दिखने लग जाता है। कई बार ऐसा होता है कि लोगों को पहले होने वाली घटनाएं पहले ही दिखने लग जाती हैं। ठीक है? उसका ईस्ट उसे दिखने लग जाता है। ठीक है? आंख बंद करते उसे महसूस होती हैं चीजें। ठीक है? और खुली आंखों का वाइब्रेशन इतना तेज नहीं होता है जितना वो त्रिनेत्र का तेज होता है। खुली आंखों से आप उतना देख सकते हो जितनी इसकी देखने की क्षमता है। लेकिन तीसरे नेत्र की वो क्षमता है जो हमारी सोचने की क्षमता से भी ज्यादा देख दिखाता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

तो जैसे अभी आपने कहा कि वो भूत भी देख सकते हैं। तो इसका मतलब क्या वो पास्ट लाइफ भी देख सकते हैं अपनी ज्यादा।

बिल्कुल देख सकते हैं। लेकिन इसका एक नियम होता है। गुरु समझाता है कि किस तरीके से जाना है। अगर आप पहुंच गए उस चेतना में तो वापसी कैसे आओगे? Karnpisachini Brahmarakshah aur

ओके।

मतलब ऐसा भी कई बार होता है कि लोग वहीं फंस चुके हैं।

बिल्कुल। कई बार हो जाता है। वो अटक जाते हैं। इसलिए कहा गया है कि इसे ज्यादा से ज्यादा आप 15 मिनट तक आप एस्ट्रल ट्रैवल कर सकते हो। नहीं तो वापसी अपनी बॉडी में आना पड़ेगा। Karnpisachini Brahmarakshah aur

हम ओके।

हम तो जो एस्ट्रल ट्रेवल करना जानता है वो इस चीज को समझता है। वो किसी भी जगह किसी भी समय पहुंच सकता है।

ओके

तो जैसे अभी आपने कहा वो किसी भी जगह पहुंच सकता है। मैंने एक बुक रीड करी थी उसमें उन्होंने बताया था कि वो एस्ट्रल ट्रेवल करके वो कैलाश पर्वत उन्होंने देखा। एंड ऐसा नहीं है कि वो सिर्फ इमेजिन कर रहे हैं। वो रियल में कैलाश पर्वत उन्होंने पर गए। वहां के वहां पे जो साधु थे उनसे मिलकर आए थे। एस्ट्रल ट्रैवल करके।

एस्ट्र ट्रैवल जब आप करते हो कैलाश मानसरोवर की तो यात्रा होती ही है। आप किसी भी ग्रह पर भी जा सकते हो। जो ऊपर हमारे अंतरिक्ष में कुछ सिद्ध योगी महापुरुष हैं जो सप्त ऋषि में भी हैं जो कुछ ऐसे ऋषिज हैं जो ज्ञान महापर्व ऊपर ध्यान में बैठे हुए हैं। सहस्त्र सालों से हम ठीक है? आकाशिक रिकॉर्ड्स जो बताए गए हैं। वो भी वहीं पर हैं ऊपर। ठीक है? तो वो कैसे पता चलते हैं? जब आप वहां ट्रैवल करते हो हम नहीं तो आप पता कैसे करोगे Karnpisachini Brahmarakshah aur

मतलब हम जो यह कैलाश पर्वत है या फिर जो आकाश आकाशचारी ऋषि मुनि है उनसे भी कनेक्ट कर सकते हैं हम

बिल्कुल कर सकते हो लेकिन इसके लिए आपके अंदर की जो ऊर्जा है और जो लगन है वो इतनी गहराई से होनी चाहिए कि आप उस अवस्था को प्राप्त कर चुके हो हम इसके लिए सबसे जरूरी होता है आपके आसन का सिद्ध होना ठीक है जब तक आसन सिद्ध नहीं होगा आपकी चेतना अब चेतना कैसे समझ आएगी? हम ठीक है ना? तो इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है आसन पे सिद्ध होना। आप एक आसन में बैठ गए। तो आसन सिद्ध का मतलब यह नहीं है कि आपने मंत्र जाप करने हैं। आपने इतना जाप करना है। आसन सिद्ध का अर्थ यह होता है Karnpisachini Brahmarakshah aur

कि आप मिनिमम थ्री आवर्स बिना हिले हुए एक सिचुएशन में एक पोजीशन में बैठे हुए हो। आंख बंद करके। वो आसन सिद्ध कहलाता है। हम ठीक है। अब क्या होता है? लोग समझते हैं कि आसन सिद्ध हमने माला घुमाई तो होगा। नहीं आसन सिद्ध है कि आपकी बॉडी और माइंड स्थिर हो गया एक अवस्था में। ठीक है? फिर जब आप एक अवस्था में स्थिर हो जाते हो तो तब आप कनेक्शन करते हो ऊपर वाले से परम तत्व से। ठीक है ना? जब आप परम तत्व से कनेक्शन करते हो तो आपको अनुभव होने लगते हैं। अब यहां क्या होता है? हम आधा घंटा बैठे या तो पैर सो गया या कहीं इचिंग होने लग गई तो हमारा ध्यान जो कनेक्ट होना था वह डायवर्ट हो गया। क्लियर हुआ आपको? Karnpisachini Brahmarakshah aur

जी जी सर आपने बहुत अच्छे से एक्सप्लेन करा है। सर यहां से मैं कन्वर्सेशन थोड़ा सा डाइवर्ट करना चाहती हूं। आपने अपने पिछले पॉडकास्ट में कर्ण पिशाचिनी के बारे में बहुत इंफॉर्मेशन दी है। मैंने आपके पॉडकास्ट देखे हैं। तो मैं इस टॉपिक पर तो नहीं जाना चाहूंगी कि कर्ण पिशाचिनी क्या होती है। सर आपका कभी आमनासामना हुआ है किसी कर्ण पिशाचिनी से।

देखिए आमनासामना की तो बात नहीं है बट हमारे साथ जो हमारे मित्र थे उनके पास थी ये चीज हम ठीक है ना तो उसकी जो एनर्जी है ना वो अपने को समझ नहीं आती क्यों कहीं ना कहीं उसका 24 घंटे कान में फुसफुसाते रहना ठीक है आप किसी चीज को कितना सुन लोगे जब तक आप उसे किसी कार्य में नहीं लगाओगे वो आपके कंधे पे बैठ के फुसफुसाती रहेगी हम ठीक है आप इयर बर्ड्स लगा के कितनी देर आप सुन सकते हो भजन को या गानों को या किसी भी चीज को जो आप सुनना पसंद करते हो एक घंटा 1ढ़ घंटा 2 घंटा ज्यादा से ज्यादा मूवी देख ली तो 3 घंटा अगर वही चीज आपके 24 * 7 चले तो कैसा होगा और दूसरी चीज वो आपका भूत भवा बता सकती है भविष्य वर्तमान नहीं बताएगी अच्छा तीसरी चीज कोई देवी की सेवा करता है महादेव की सेवा करता है Karnpisachini Brahmarakshah aur

तो उसके बारे बारे में वह बिल्कुल नहीं बताएगी। अच्छा ओके। ठीक है। तो ये चीज है। अब देवी से बड़ा कौन है? जो जगत जननी है वो एक पिशाचनी है। उन्हीं के अंतर्गत आती है। उन्हीं की सेवा में भूत प्रेत पिशाच किन के साथ चलते हैं? महादेव और देवी महाकाली के साथ रहते हैं। है ना? तो ये चीज समझने वाली है। तो अगर कोई देवी का साधक है या महादेव का साधक है या ऊंची अवस्था के जो हमारे देव देवी हैं, नरसिंह देव हैं। ठीक है ना? त्रिदेव में से कोई भी ले लो आप हनुमान जी ले लो यह नहीं यह दूर से ही उनके भक्तों से दूर रहती है Karnpisachini Brahmarakshah aur

दूर रहती है उनके बारे में ना कुछ बताएगी और उनसे दूर रहेगी हम अब कई लोग हैं अपने शरीर पे प्रेत बुला के देते हैं बुझा बुझा समझते हैं आप किसी के बारे में बताना हम ठीक है तो अब लोग सोचते हैं वो भगवान बता रहा है देव बता रहा है क्योंकि वो उस दुनिया से है वो आपका हमारा सबका काला चिट्ठा जानते हैं। उनके पास ज्ञान है। इसलिए वो बताते हैं। वो कहीं भी ट्रैवल कर सकते हैं क्योंकि ऊर्जा है वो। हम ठीक है? ऊर्जाएं दो प्रकार की बताई गई है। एक नकारात्मक, एक सकारात्मक। नकारात्मक के बिना सकारात्मक का अस्तित्व नहीं है Karnpisachini Brahmarakshah aur

और सकारात्मक का नकारात्मक के बिना अस्तित्व नहीं है। यह साइंस भी मानता है। जब आप बिजली का बटन ऑन करते हो तो उसमें एक वायर जो होती है नेगेटिव होती है और एक पॉजिटिव होती है। तो लाइट जलती है। जी। नहीं तो वह भी ना जले। ठीक है? तो दोनों एक दूसरे के पूरक है। तीन गुणों को अगर समझोगे आप एक सतोगुण, एक रजोगुण, एक तमोगुण। यही बैलेंस करते हैं आधार। ठीक है? और ये तीनों गुण किस में आते हैं? रजोगुण आ गए। है ना? राजा, महाराजा राजयोग जिसका लिखा हुआ है। है ना? जो करता है। तमोगुण जो तामसिक शक्तियों के साथ रहता है। उग्र शक्तियों के साथ रहता है। क्रोध जिसे ज्यादा रहता हो। सतोगुण जो सात्विक तरीके से चलता है Karnpisachini Brahmarakshah aur

तो यह तो आधार ही है ना चलाने में असुर शक्ति तमोगुण में थी जी अगर असुरों का अस्तित्व नहीं होता ठीक है तो आज माताओं के इतने रूप कैसे निकल के आते हम रक्त बीज को मारने के लिए देवी पार्वती को काली नहीं बनना पड़ता जी ठीक है महिषासुर को मारने के लिए महिषासुर मर्दिनी नहीं बनती जी तो हर एक चीज के पीछे कोई ना कोई कड़ी जुड़ी होती है ठीक है। यह चैन है, यह सर्कल है। घूमता रहता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

हम अच्छा अभी आपने जैसे कहा कि ये एंटिटीज किसी के अंदर आती हैं और वो प्रिटेंड करती हैं कि वो भगवान है, देवी हैं। तो आपके पास कोई ऐसा केस है तो बताइए जब आपके सामने यह हुआ हो। Karnpisachini Brahmarakshah aur

हां बिल्कुल हुआ है। इसमें अधिकतर छलावा भी काम करते हैं। हम ठीक है। प्रेत भी काम करते हैं। अब किसी ने एक मुसलमान ही प्रेत चलाया हुआ था। हम ठीक है। अब मुसलमानी प्रेत जो चला हुआ था ठीक है? वो लड़की पे आके गलत कार्य करना होता है। परेशान करना है ना? ये सब चीजें होती हैं। अब जिस पे बीतती है वो जानता है। अब सामने वाला तो कह देता है ये क्या चल रहा है। भगवान ना करे किसी के घर में किसी की बहन बेटी के साथ या किसी भाई के साथ, पुत्र के साथ यह घटनाएं घटे। लेकिन जिसके घर में यह चीजें जाती हैं या बिगाड़ती हैं तो पता चलता है कि क्या होता है। फिर उसमें क्या है? अगर आपको इन चीजों से सुरक्षित रहना है तो वारा अवतार हैं जो विष्णु भगवान उनकी सेवा करनी चाहिए। ओके हां वारा अवतार से मुसलमानी तंत्र बिल्कुल दूर रहता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

ओके हां इसका कोई पर्टिकुलर रीज़न है?

बिल्कुल है। हम वारा को वो अच्छा नहीं समझते हैं। वारा उनके में नापाक है। दिस इज द रीज़। अभी जैसे हमने इन एंटिटीज की बात करी है। आपने कभी कर्ण पिशाचनी को देखा है कि वो दिखती कैसे है? उसकी अपीयरेंस कैसी है?

देखो हर एक चीज ना यह जो होती हैं हम इनका असली मूल रूप देखोगे तो बहुत भव्य है। लेकिन अगर कई बार ये दर्शन में दिख जाए तो बहुत सुंदर भी हैं। अच्छा हां दो रूप होते हैं। बदलने में सक्षम होते हैं। अब वहीं डाकनी आप का अगर मैं बताऊं तो डाकनी के जो बाल है ना ठीक है ना? वो पैरों से नीचे हैं हम और दिगंबर स्वरूप है ठीक है और देवी को बहुत प्रिय है अच्छा डाकनी शाकनी हाकनी हम इनकी हर एक का ना अपना ज़ोन है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

हर एक की अपनी ताकत है। ठीक है? अगर आपकी भाषा में समझाऊं तो नॉर्मल इंसान की भाषा में कोई वर्कर होता है, कोई सीनियर मैनेजर होता है, कोई डायरेक्टर होता है। तो इसी प्रकार भूत, प्रेत, पिशाच, डाकनी, साकनी, क्षेत्रपाल इनके अपने-अपने ओदे हैं। हम अपनी-अपनी ताकत है। किसी को थोड़ा दिया गया है, किसी को ज्यादा दिया गया, कई किसी को बहुत ज्यादा दिया गया है। हम और साधक एक ऐसा है जो इन सबको अपने साथ ले चलता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

हां। तो अभी जैसे आपने इन एंटिटीज की बात करी है। आप डाकिनी और हाकिनी के बारे में बताएंगे कि यह क्या होती हैं और इन इनका क्या काम होता है? जैसे आपने बताया इनको एक पर्टिकुलर काम सौंपा जाता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

डाकिनी देखिए मां के अंश से निकला हुआ ही एक उनका स्वरूप है। उन्हीं के साथ रहने वाली उनकी सहचारनिया कह लो। ठीक है? उनकी सेविका कह लो। ठीक है? डाकनी हो सकती है। ठीक है? और हमारे तंत्र शास्त्र के अनुसार हमारे लिए वह पूजनीय है। ठीक है? उसमें इतनी क्षमता होती है कि वो ब्रह्मांड की ऊर्जा को भी इधर-उधर कर दे भगवती के आशीर्वाद से। ओके? हां। वो किसी भी चीज को करने में समर्थवान है। चाहे वो ब्रह्मांड में हो या वो मृत्यु लोक पे हो। वो इतनी ताकतवर होती हैं। ओके। एंड हाकिनी आकनी उसी के साथ चलती हैं। ये तीनों एक साथ चलती हैं। हम ठीक है ना? और इसके बाद योगनियां आ जाती हैं। आपकी 64 योगनियां बताई गई हैं। Karnpisachini Brahmarakshah aur

और हर योगिनी अपना-अपना जैसे किसी को पैसा चाहिए, किसी को अट्रैक्शन चाहिए। हर योगिनी का अपना दायित्व है। और योगनियां मां की एक सहचारनी सहेलियां बताई गई हैं। ठीक है? ये मां के साथ चलती हैं। इनमें दो मुख्य होती हैं। अज्या और विजय। हम हां यह योगनियां हो गई। अब इसी के साथ-साथ तंत्र का छोटा सा थोड़ा सा ज्ञान दे देता हूं क्योंकि डीप जाना मना होता है तंत्र के बीच में क्योंकि शिव ने स्वयं बताया गया है हमारे तंत्रशास्त्र में कि इसे को पात्र को दें पात्र को मत दें। पात्र को जो यह ज्ञान देता है, इसकी गहराई समझाता है, वह इसका फल जरूर भोगता है। एक जनरल नॉलेज के लिए बेसिक नॉलेज होनी चाहिए। BKarnpisachini Brahmarakshah aur

लेकिन इसके डीप का ज्ञान नहीं देना चाहिए। तो इसी में 52 वीर आ जाते हैं। ठीक है? जो मां के आगे चलते हैं। मां की सेवा करते हैं। हर एक मां का अपना एक वीर होता है। ठीक है? नरसिंह देव का नरसिंह वीर है। ठीक है? काली मां का कलवा वीर है। हम ठीक है। हरिया वीर है। ठीक है। तो ऐसे ये वीर होते हैं। ओके। मसान का मसानिया वीर है। ठीक है? कालिया मसान वीर है। ये अधिकतर लोग इनको वीरों को जो चलाते हैं ये अधिकतर गलत कार्यों के लिए चलाए जाते हैं। हम क्योंकि जब इन्हें सिद्ध किया जाता है तो वचन यही लेते हैं। इन्हें भोग प्रसाद पे उतारने के बाद वचन ये लिए जाते हैं। जो कार्य बोलूंगा तू करेगा। और वचनों का बहुत बड़ा खेल होता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

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Kamakhya Devi Mantra

एक बार वचन में बंध गए तो चाहे वो सही हो, चाहे वो गलत हो। उन्हें वो करना ही पड़ेगा। लेकिन इसका कर्म का फल कौन भोगता है? साधक। ओके। आज मैंने कोई चीज सिद्ध कर रखी है या मेरे साथ कोई आशीर्वाद है। मैं उसे सही में चलाऊंगा या गलत में चलाऊंगा। चला तो मैं रहा हूं। बुद्धि मेरी काम कर रही है। उसे वचन में लेके अगर मैं जबरदस्ती कुछ उससे गलत करवा रहा हूं और वह कर रहा है। तो वो अपना रास्ता ढूंढेगा भी आपसे निकलने का। हम ठीक है? और आपको फंसाएगा भी कहीं। ओके। कहां फंसाएगा? अब कोई उससे बड़ी एंटिटी ले बैठा है। हम वो उसके वहां फंसा देगा। आप गलती से उधर की तरफ चलाओगे वो उसे बांध के फ्री कर देगा। ओके। तो वो वहां से मुक्त हो गया ना। क्योंकि ये एंटिटियां भी नहीं चाहती गलत में चले।

इन एंटिटीज को सिद्ध वैसे पैसों के लिए करते हैं। लोग फेम के लिए करते हैं। यह ना एक नशा होता है। हमारी लाइन में इसे नशा कहते हैं। हर एक को एक ऊर्जा चाहिए अपने साथ। ठीक है? हमारे में पैसा नशा नहीं होता है। हमारे में नशा होता है। ऊर्जा किसके पास कितनी है? हम ठीक है? कितने पॉजिटिव हैं, कितने नेगेटिव हैं। यहां शक्ति प्रदर्शन लोग ज्यादा करते हैं। ठीक है? और शक्ति प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। सेवा करनी चाहिए। जी। ठीक है? आपके पास आई। आपने सेवा करी। आपने सिद्ध किया। आपने अपने कर्म से सिद्ध किया। लेकिन अब उसे सही जगह पे लगाना सीखना चाहिए। और सही जगह ही लगाना चाहिए। सही जगह ही लगाना चाहिए।

और लगाना क्यों? देखो एक समय ऐसा आता है हमारा शरीर भी छूट जाता है। हम एंटिटियां भी मुक्त हो जाती है। ठीक है ना? तो फिर बांध के क्यों रखना? अपने मोक्ष के लिए बड़े हो। तंत्र का मार्ग मोक्ष का बताया गया है। एंड हां। तो मोक्ष का रास्ता पकड़ो। धीरे-धीरे सब चीजें छूट जाती हैं। आज आप साकार मूर्ति की पूजा कर रहे हो। जब आप धीरे-धीरे आपका लेवल अप होगा, आप निराकार की तरफ बढ़ जाओगे। निराकार से एकांत में चले जाओगे। एकांत से कंधरा में विराजमान करो। फिर संसार आपको सिर्फ देवी में लगेगा। हम और जब देवीम में लगता है तो कुछ चाहिए क्या? Karnpisachini Brahmarakshah aur

जी बिल्कुल। अच्छा जैसे अभी हमने इतनी सारी एंटिटीज की बात करी है। बागेश्वर धाम के जो धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी हैं वो काफी लोग बोलते हैं कि उनके पास कोई एक एंटिटी है। उन्होंने सिद्ध कर रखी है। वो उनको बताती है। आपकी राय जानना चाहती हूं। आपको क्या लगता है क्या एंटिटी है? Karnpisachini Brahmarakshah aur

फिर मैं आपको जवाब दूंगा इसका। मुझे तो लगता है उनके ऊपर हनुमान जी की कृपा है। एंड वो बताते हैं हम जी। उनके दादा गुरु की उस स्थान पे समाधि है। हम ठीक है ना? दादा गुरु का आशीर्वाद है। ठीक है? हनुमान जी की कृपा तो साथ में है ही। सीताराम की कृपा भी है। लेकिन उन्होंने अच्छे के लिए किया। चीजों को अच्छा किया। है ना? लोगों को एक मार्ग दिया। है ना? तो वहां पर जो भी चीज है जो आप सोचते हैं वो कृपा है,

आशीर्वाद है। कई लोग उसे सिद्धि मांगते हैं। ठीक है? वो उसके गुरुओं का आशीर्वाद है। उन्होंने उस तप से कमाया, उस साधना से कमाया और पॉजिटिव रखा, गलत में नहीं दिया। तो आज वो वहां तक हैं। कई लोग कहते हैं कि बागेश्वर धाम के पास कर्ण पिशाचिनी है। जहां साक्षात बागेश्वर बाबा बैठे हो। हम ठीक है। जो जहां सीताराम नाम का उच्चारण चलता हो। ठीक है? जहां हनुमान जी की सेवा होती हो। वहां पिशाच क्या करेगा? वहां वो हनुमान जी की सेवा करेगा। हां वह कुछ और नहीं कर सकता है।

पिशाचनी वहां टिक भी नहीं सकती है। नहीं टिक सकती है। हम तो यह भ्रांतियां है। जितना मर्जी फैला लो। देखो सच तो यही है ना जो सच है जहां सकारात्मक ऊर्जा है वहां नकारात्मक नहीं रहेगी। हम ठीक है? तो ये चीजें समझने वाली हैं। पिशाच का वहां क्या काम? जहां पे आरती सुबह शाम होती हो। ठीक है? कथा चलती हो। वहां पिशाच रुकेगा। जैसे वह पर्चे में बता देते हैं कि तुम्हारे साथ यह होने वाला है तो लोग कहते हैं Karnpisachini Brahmarakshah aur

कि उनके कान में वह बता देती है। यह एक तरह की हनुमान जी की साधना होती है। ठीक है? हनुमान जी की ये साधना करने के बाद इसके ये अनुभव आते हैं। ठीक है? तो ये हनुमान जी की कृपा से प्राप्त होता है। ये कोई पिशाचिशाच नहीं बताता। ये हमारे तंत्र शास्त्र के हिसाब से यह हनुमान जी की साधना है। आप कह रहे हैं उन्होंने हनुमान जी की ही साधना कर रखी है।

जी उनको देखकर लगता भी है कि उनके ऊपर हनुमान जी की ही कृपा है। जी अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता जी कौन है वो? हनुमान जी सर अब मैं आपसे कुछ पितृ पक्ष के क्वेश्चंस पूछना चाहती हूं क्योंकि अभी श्राद्ध भी शुरू होने वाले हैं। सबसे पहला सवाल यह है कि अगर हमारे सपनों में हमारे पितर आते हैं और वह भोजन मांगते हैं तो क्या वह कुछ बोलने की कोशिश कर रहे हैं? इसका अर्थ यह है कि आपने पितरों की ना तो अमावस पूछी। पूजी सॉरी और ना आपने उनका पितृ पक्ष जैसे आ रहे हैं उसकी सेवा करी ना उनका तर्पण किया ठीक है Karnpisachini Brahmarakshah aur

तो वो इसलिए आकर संकेत देते हैं कि आपकी यह गलतियां हैं आप इन गलतियों को सुधारो ठीक है अमावस पे खीर बनानी चाहिए है ना पितरों को भोग लगाना चाहिए ब्राह्मण को भोज कराना चाहिए ठीक है वह हम नहीं कराते हैं तो पितृ दोष लगता है आज 90% लोग अगर कुंडली दिखाएंगे अपनी तो ब्राह्मण सबसे पहले ज्योतिषचार्य आपको यही बोलेगा पितृ दोष है। पितृ दोष है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

पितृ दोष है। और वो पितृ दोष के चक्कर में वो सुनसुन के भी जो बेचारा कुंडली दिखाने जाता है वो भी पक जाता है। हम क्यों? क्योंकि उसको सही उपाय नहीं मिलता है। सही तरीका नहीं मिलता है। सर क्या श्राद्धों में ब्राह्मण को खाना खिलाना सच में सीधा पितरों को लगता है? बिल्कुल लगता है। इसलिए बताया गया है। देखिए अगर हम साधना भी करते हैं। कन्या भोज ब्राह्मण भोज हमारे में भी बताया गया है साधनाओं में कि कराना चाहिए। ब्राह्मण यानी जो ज्ञान रखता हो ब्रह्म का जिसने वेद पढ़े हैं जो आगे का मार्ग देता है। आज हमारे को आगे का मार्ग चाहिए तो वेद पढ़े वही देगा ना जिसने वेदों का अध्ययन किया वही हमारे पितरों को मुक्ति दिला सकता है ना और कौन दिलाएगा? है Karnpisachini Brahmarakshah aur

ना? इसलिए वो पूजनीय होते हैं। यह करना ही चाहिए। करना ही चाहिए। ओके। ओके। और सर शराद में पशु पक्षियों का क्या योगदान रहता है? पशु पक्षियों का योगदान रहता है। देखिए आप उन्हें भोजन करा रहे हैं। जैसे कौवा है हम है ना? कौवे को कहीं ना कहीं हमारे पितरों के साथ जोड़ा गया है। ठीक है? तो उसको जैसे आपने खीर बनाई पितरों के लिए। पितरों को सफेद भोग लगता है। सफेद वस्त्र दान में दिया जाता है। यह भी बहुत जरूरी है जानना। और आप उनके पिंड देखेंगे तो पिंड भी गाय का दूध होता है। है ना? जौ का आटा होता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

इससे बनाए जाते हैं। सफेद हो गए ना है ना? तो शहद डाला जाता है ताकि वो उन तक पहुंच सके। सात्विक रूप से सफेद यानी सात्विक का प्रतीक है। इसलिए हम आपको क्या करना चाहिए? उपाय दे देता हूं। पितृ पक्ष जैसे आ रहे हैं। है ना? पितृ पक्ष में सफेद चावल की खीर बनाएं। ठीक है ना? अपने पितरों का ओम पितृ देवताभ्यो नमः का मंत्र बोल के अपने घर के मंदिर में चाहे भोग लगाएं रख दें थोड़ा सा कुछ उसमें से निकाल के ऊपर छत पे रखा है पक्षियों के लिए ठीक है खीर और बाकी सिर्फ अपना परिवार खाएं बाहर का नहीं खाएं ठीक है और कुछ वस्त्र ले ले सफेद सवा मीटर सवा दो मीटर सवा5 मीटर जितनी क्षमता है देने की कुछ दक्षिणा ले सफेद मिठाई ले ब्राह्मण को मंदिर में देके आए है हम और यह हर अमावस उपाय किया जाए तो अति उत्तम है। पितृ प्रसन्न होते हैं और पितरों की घी की ज्योत लगाएं।

ओके हां अगर लगा सकता है अमावस के अमावस पितरों की घी की ज्योत लगाएं। पितृ प्रसन्न है तो आप रंग से राजा कब बन जाओगे पता ही नहीं। शिव महापुराण में भी लिखा हुआ है। पितरों का बहुत बड़ा स्थान है। इसलिए पितृ देवता भव कहा गया है। मतलब उन्हें देवों की योनि दी गई है। संज्ञा दी गई है। लेकिन जो हम गलत कार्य कर देखिए कोई गलत कार्य किया किसी ने वो मृत्यु को प्राप्त हो गया। प्रेत योनि में चला गया। अब उनको सही दिशा देने के लिए उनकी मुक्ति के लिए ठीक है। हम ये पितृ पूजा करते हैं। ओके। सर कैसे पता लगेगा कि पितरों की मुक्ति नहीं हुई है? देखिए वह तो कुंडली है। कुंडली आप दिखाते हैं तो उसमें ज्योतिष देख के बोल देता है Karnpisachini Brahmarakshah aur

ना पितृ दोष लगा हुआ है या किसी साधक के पास जाओगे साधक देख के बोल देगा पितृ दोष लगा हुआ है जाके इलाज कर ले। हम्म। ठीक है। तो वो पता चल जाता। तो सर श्राद्ध के समय क्या पितरों को सिर्फ याद कर लेना काफी है या कुछ करना ही जरूरी है? याद किया आपने वह बात ठीक है लेकिन एक जो नियम पद्धति हमारे शास्त्रों की बनी हुई है उसे करने में क्या बुराई है उसे फॉलो करेंगे आपने याद किया याद किया खत्म हो गया लेकिन आपने उसे नियम से किया उसका रिजल्ट तब मिलेगा ना आपको हम आपने सोचा कि मैं गाड़ी ले लूं ठीक है उदाहरण के तौर पे आनंद आ गया आपको सोचने मात्र से नहीं आया लेकिन जब जब तक आप लोगे और उसे चलाओगे फिर आपको कैसा लगेगा हम दोनों में फर्क है

ना यह फर्क है ओके और सर श्राद्ध में दान की क्याेंस होती है दान देखिए पुण्य बताया गया है हमारे शास्त्रों में महापुण्य कन्यादान भी है दान कई प्रकार के हैं कन्यादान भी है भूमि दान भी है ठीक है सोना दान भी है पहले के समय में सोना भी तो दान दिया जाता था। ठीक है? और कई कई साधक ऐसे हैं जिसने अपनी साधना करी और अपने इष्ट को ही समर्पित कर देते हैं। तेरा तुझको समर्पित ये हमारे कर्मों को हमारी आत्मा को शुद्ध रखते हैं।

हमें सकारात्मक रखते हैं। हमारे अंदर अहम नहीं आने देते कि मेरा मेरा मेरा दान करके आप कभी दान करिए या पक्षियों को दाना खिलाइए। आप उस दिन देखिए आपकी ऊर्जा बदली होगी। अंदर से एक पीस फील करोगे आप। पॉजिटिविटी आएगी। यस दान का इतना बड़ा महत्व है कि वो हमारे ही अंदर हमारी चीजों को शांति प्रदान करता है। ओके। सर एक चीज और मैं पूछना चाहती हूं कि क्या शराब सिर्फ बेटे ही कर सकते हैं? हम या बेटियां भी कर सकती हैं? बेटे का ही अधिकार होता है। बेटियां देखिए कन्यादान होके चली जाती हैं। ठीक है? तो उसका जो मायका है

वह छूट जाता है। वहां से संबंध खत्म हो जाते हैं। क्योंकि आपने वहां पर देवों को देवियों को साक्षी मान के अग्नि देव को साक्षी मान के सात वचनों में फेरे लिए हैं। अग्नि के फेरे लिए हैं जो अग्नि देव हमारे पंच तत्वों में माने गए हैं। जिन्हें स्वर्ग लोक में स्थान प्राप्त है इंद्रोक देव के साथ। ठीक है? आपने तो वो कन्या दान की जाती है। इसलिए कन्यादानम बताया गया है। ठीक है? जब दान दे दी कन्या तो वो चीज उसकी रही नहीं तो वो नाता वहां से पूरा छूट गया। तो मायके का कुछ भी करने में असमर्थ है। उसका गोत्र भी फिर उसके ससुराल का लगेगा। Karnpisachini Brahmarakshah aur

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Rudranath Ji Aghori Maharaj

ठीक है। उसके जो भी संस्कार हैं ससुराल वाले वो ही चलेंगे। जी। अभी हमने हनुमान जी की बात करी है। ऐसे ही जो और देवी देवता हैं उनके बीज मंत्र होते हैं। स्पेशली जैसे हमारे दश महाविद्या हैं। बहुत सारे लोग होते हैं वो इंटरनेट में देख लेते हैं। YouTube में देख लेते हैं और मजे-मजे में वो मंत्र बोल देते हैं। उनके जो बीज मंत्र होते हैं।

तो आप बताएंगे अगर कोई मजे-मजे में ऐसे पढ़ता है तो उसके साथ क्या होगा और अगर कोई रियल केस हो तो उसके बारे में भी बताइए। इसका रियल केस बिल्कुल है। देखिए एक लड़का था 27 28 साल का YouTube पे साधना देखी और जो विधि बताई उसने उस साधना को उठाया और बैठ गया। रात्रि में 11:00 बजे के बाद सरसों के तेल का दिया लगाना। उसमें दो लौंग डालना। ठीक है? अपना जो यंत्र बनाना है मंडल जिसे कहते हैं Karnpisachini Brahmarakshah aur

हम लोग वह बनाया। ठीक है? उसके बाद माला का उच्चारण करना, जाप करना। उसने एक भाव से उस चीज को करना शुरू कर दिया। जब करना शुरू कर दिया ना तो गुरु हैं ना पूर्ण ज्ञान था तो वो चीजें उसे दिखने लग गई। अब जब दिखने लग गई तो उन चीजों से इतना परेशान हो गया कि वो उसको कहीं ना कहीं डिस्टर्ब करने लग गई। उसका माइंड जो सकारात्मक जगह पे काम करना था वो काम करना बंद कर गया। हम ठीक है? और जब बोलने लगा तो वह डर डर के बोलने लगा हकलाते हुए जो जैसे मैं आज एकदम अच्छे से बात कर रहा हूं Karnpisachini Brahmarakshah aur

आपको उत्तर दे रहा हूं वो ऐसे बात करने लगा मेरे को ऐसा दिख रहा वो डर इतना बैठ गया कि वो उससे उभर नहीं पाया हम तो इनका कहीं ना कहीं ज्ञान होना जरूरी है। तंत्र अपने में वो रहस्यमय है कि जो अपने अंदर असीम ब्रह्मांड की ऊर्जाओं को छुपा के बैठा है। ठीक है? कौन सी तार को छेड़ के आप कौन से बटन को ऑन कर देते हो ये आपको नहीं पता है हम और उसका इफेक्ट क्या होता है कहीं ना कहीं आपको उसका हर्जाना किसी ना किसी रूप में दिया जाता है

अब तो इतना पहले के समय में अगर आप देखोगे अगर आप समझोगे साधनाओं के क्षेत्र को तो पहले के समय में यहां तक होता था कि व्यक्ति ऑन द स्पॉट साधना करते हुए अपना देह भी त्याग देते थे गलती हो जाती थी तो हम ठीक है आपने मंडल तोड़ा नहीं घेरा तोड़ा नहीं आप मृत्यु को प्राप्त हुए नहीं। इसलिए तंत्र को दो धारी तलवार की कहा गया है कि अगर आपको उस पे चलना है तो बहुत संभल के पैर रखना होगा। आपने गलती करी नहीं कि आप सीधा उसका दंड भुगतोगे।

उसमें माफी नहीं है। और सबसे बड़ी बात यह है कि आज का जो युवा पीड़ित है वो तंत्र को देख के बहुत ज्यादा आकर्षित हो रहा है कि हमें तंत्र में आना है। हमें साधनाएं करनी है। साधना एक जन्म दो जन्म का खेल नहीं होता है। साधना कई कल्पों से चलती हैं। और हर एक को गुरु धारण करने पड़ते हैं। आपको विद्या का ज्ञान लेना है। विद्या जाननी है तो जब हम स्कूल जाते हैं तब भी हम मास्टर बनाते हैं। टीचर बनाते हैं, गुरु बनाते हैं। Karnpisachini Brahmarakshah aur

आप तो वह रहस्य जानने जा रहे हो जो ब्रह्मांड को ले बैठा है। हम ठीक है? और उसमें अगर आप गलती करोगे तो हर्जाना देना पड़ेगा। तो ये तंत्र सबके लिए नहीं है। मैं तो सबको एक ही बात कहता हूं। भक्ति करो। तंत्र में मत आओ। तंत्र में आओगे नुकसान कहीं ना कहीं आपको एक समय पे हो जाएगा। तंत्र आपकी जिंदगी आपसे मांगता है। हम जिंदगी कैसे मांगता है? आपका परिवार छूटेगा। आपके अपने छूटेंगे, आपका मुंह छूटेगा। ठीक है? आपको कोई चीज पसंद नहीं आने लगेगी। ठीक है? आपको कोई कुछ बोलेगा तो वो ऊर्जा यहां बैठी रहेगी।

और कब आप कुछ बोलोगे और सामने वाले का गलत होगा। ठीक है? आपको लोग समझ नहीं आने लगेंगे। आपको लोगों की भीड़ समझ नहीं आने लगेंग। ठीक है। आपको एकदम एकांत कर देता है। तो छूट गया सब? जी। क्या रहा? जिंदगी में सिर्फ माला और आपका यीस्ट तो तंत्र में वही पैर रखें जो स्वयं को भूलना चाहता हो अपने अस्तित्व को मिटाना चाहता हो अपने शरीर को इस देह को मिटाना चाहता हो जी तो तंत्र ये नहीं है आप तंत्र में जो जिस हिसाब से सोच रहे हो वो तंत्र है ही नहीं तंत्र एकांत कर देता है शांत कर देता है Karnpisachini Brahmarakshah aur

उसे समझ नहीं आता अनुष्ठान में बैठता है तो उसे कोई नहीं चाहिए आसपास खुद बनाएगा खुद पकाएगा खुद खाएगा ये नियम नियम है जी आज साधनाएं आप Facebook पे ले लो आप Instagram पे रील ले लो ठीक है आप YouTube पे साधनाएं ले लो आप Google पे सर्च करो मेरे को इस देवी की साधना करने दो वो पूरा लिख के दे देंगे ठीक है तो वो नियम कहां रहा है जो शिव ने दिया था हम राइट जी और जब नियम से आप नहीं कर रहे हो जो भगवान शिव ने नियम बनाए आप नहीं कर रहे हो आप उठा के कर रहे हो आपने YouTube से देख के करी आपने या Instagram से किसी से ली ठीक है? तो वो आपको नुकसान 100% देगी। जी। आज आप कंट्री का लॉ तोड़ो, आप कोई गलत काम करो तो पुलिस दंड देती है ना।

जी। तुरंत देती है। वो तो ब्रह्मांड का लौ है जो स्वयं महादेव ने दिखाया। तो वो कैसे छोड़ेंगे? जी। अगर किसी ने बगलामुखी माता के बीज मंत्र मजे-मजे में पढ़ लिए तो क्या होगा? वो शत्रुओं का नाश करती है देवी। ठीक है? स्तंभन करती है जीवा का पीतांबरा देवी के नाम से भी जानी जाती है। है ना? अगर बगलामुखी माई का बिना ज्ञान के आप जाप करते हो तो उसका दंड आपको देना ही पड़ता है। वो किस तरीके से लेती है वो उसकी इच्छा है। हम देना जरूर पड़ेगा क्योंकि इनकी साधना के नियम होते हैं। आपको हर एक चीज पीली चाहिए होगी। Karnpisachini Brahmarakshah aur

वस्त्र भी पीले, बाती भी पीली, भोग भी पीला, हम स्थान भी पीला। ठीक है? तो इनकी हर एक चीज पीली होती है। इसलिए इन्हें पीतांबरा देवी भी कहते हैं। अब कई लोग क्या करेंगे? इनके में लाल लगा देंगे। हम तो तंत्र जहां सही करना है वो रिवर्स बैक भी मारता है। तो नुकसान किस क्या हुआ? तो हर एक चीज का ना एक अपना नियम है। हर देवी का अपना एक रूप है। उसका एक नियम है। उसकी एक पूजनी की पद्धति है। इसलिए मैं सबको कहता हूं गृहस्ती को कि नवदुर्गा की पूजा करो। हम हम जी। सबसे उत्तम में तंत्र की देवियों को तंत्र के देवों को आप लोग मत छेड़ो जी जब तक आपके पास अच्छे गुरु नहीं है ज्ञान नहीं है। मेरे पडकास्ट में एक आए थे। उन्होंने बताया था कि हस्बैंड वाइफ थे।

उन्होंने Google से निकालकर बगलामुखी माता के बीज मंत्र मजे-मजे में उन्होंने जाप करना शुरू करा था। तो कुछ दिन बाद उनको जो मरे हुए लोग थे वो दिखने लग गए थे। बार-बार उनके पास मतलब पूरे उनको रूम में दिखते थे। मतलब वो उनसे कनेक्ट करने की कोशिश करते थे। वो बहुत ज्यादा परेशान हो गए थे। मतलब कि हमने गलती कर दी है। बट मतलब लाइफ उनकी खराब हो गई थी पूरी। तो उसका निवारण क्या निकला? निवारण वो उनके पास गए थे। फिर उन्होंने निवारण जो भी निकाला होगा चलो अच्छी बात है। किसी का निवारण होना चाहिए। इसलिए तंत्र की शक्तियों को नहीं छेड़ना चाहिए। जी। ठीक है। अब जैसे वो दिखे थे तो इसमें आसन बंधन होता है। घेरा बंधन होता है, दिशा बंधन होता है, शरीर बंधन होता है। तो इस चीज का भी तो ज्ञान होना चाहिए। आपने मंत्र बीज मंत्र पढ़े।

बीज क्या है? सीड। आपने उसे बोया अपने अंदर। और अब आप उसे खाद और पानी और ऊर्जा कैसे दे रहे हो? जाप करके। हम ठीक है? और जब वो वृक्ष बनेगा तो उसकी शाखाएं कहां तक फैलेंग आपके अंदर? आपको उसको संभालने योग्य हो। अगर आप संभालने योग्य नहीं हो तो आपका शरीर फाड़ते हुए निकलेंगी। हम हम तो फिर क्या होगा? मृत्यु कोई प्राप्ति होगी। तो समझना चाहिए। जी सर मैं आपसे एक चीज और पूछना चाहती हूं कि जब भी हम मेहंदीपुर बालाजी की बात करते हैं वहीं पर ही भूत प्रेत वर्ड भी आ जाता है

क्योंकि वहां पर उनका निवारण होता है। जिनके ऊपर भी भूत लगा होता है वो हट जाते हैं। लेकिन एट द सेम टाइम लोग बोलते हैं कि वहां का प्रसाद जो है उसको लेकर घर नहीं आना चाहिए। वरना मेहंदीपुर बालाजी के प्रसाद को अगर घर लाए तो प्रसाद में प्रेत आपके साथ घर आ जाएगा। तो आपका क्या कहना है? पहले के समय में होता था। अब तो शायद ले आते हैं लोग। पहले के समय में प्रसाद लाना मना ही था। अभी भी वैसे नहीं लाते हैं नहीं लाने हैं। है ना? और दूसरी चीज क्या है कि अगर देखिए आपके साथ किसी के भी साथ कोई गलत नेगेटिव ऊर्जा है।

हैवी ऊर्जा है। जब आप बालाजी महाराज के क्षेत्र में ही आगमन करेंगे ना तो वहीं से पीछे हट जाती है। उसे आभास हो जाता है मोस्टली। अच्छा। हां। और जो जिन्हें आभास नहीं होता है जो जिद्दी प्रकार की होती हैं फिर उन्हें वहां बांधा जाता है हम वो इतनी बड़ी शक्ति हैं बालाजी सरकार और वहां ये हकीकत है वहां प्रेतों का बहुत अच्छा निवारण होता है बालाजी की कृपा से कई लोग ठीक हो के भी आए हैं ऐसा नहीं है तो प्रसाद लाना चाहिए वापस या नहीं नहीं लाना चाहिए नहीं लाना चाहिए नहीं आप उनकी बाउंड्री क्रॉस करोगे कहिए आपको अनुभव बता देते हैं Karnpisachini Brahmarakshah aur

एक स्टोरी सुन लीजिए जी कुछ व्यक्ति थे उनके घर में किसी सदस्य पे कोई दिक्कत थी एक परिवार पे तो उन्हें किसी ने भेजा था कि आप वहां बताओ अभी ये हमें किसी ने बताया था जो हमसे मिलने आया था उनके घर में ही दिक्कत थी तो अब तो वैसे ही मिलने आए थे हमसे कोई काम नहीं था तो जब उनके दिक्कत थी तो वो कह रहे हम बालाजी सर सरकार गए थे मेहंदीपुर मैंने कहा बहुत अच्छी बात है तो मैंने कहा क्या हुआ कह रहे जब इसे लेके जा रहे थे तो रास्ते में इसे पता चल गया था

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और इसने मतलब इतना हल्ला किया गाड़ी में टिकने से मना कर दिया। हम हां। और कह रहे जब इसने हाथ चलाया तो हमारा यहां से फटा। यहां से फटा। टाके भी दिखाए उसने। ठीक है। कह रहे बड़ी मुश्किल से लेके गए थे। उसको पहले ही पता लग गया था कि वहां तो मार पड़ने वाली है। हां। कई बार क्या होता है? आप किसी चौकी दरबार में गए या कहीं जाते हो। आप अपना इलाज करवाने जाते हो। किसी के पास नेगेटिविटी एंटिटी होती है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

है ना? आप देखिएगा जब वो जाते हैं तो शरीर में कुछ नहीं होता। सामने वाला कह देता है ही नहीं। कई बार वो चीजें इतनी सयानी होती है वो जाती नहीं है। हम राइट तो यह भी एक कारण होता है। कई बार क्या होता है ये चीजें घर में रह जाती हैं। कोई मिट्टी दोष में होता है। है ना? तो ये चीजें वहां से आ जाती हैं। अच्छा मेहंदीपुर बालाजी में पीछे मुड़ के नहीं देखना चाहिए। ये सच है। बिल्कुल सही बात है। वैसे तो पीछे मुड़ के पहले के समय में गांव देहात में भी मना था। हम ठीक है ना? दोपहर के समय में घर से निकलना भी गांव देहात में मना था। ठीक है?

आप श्मशान के आगे से निकलना मना था उस समय। ठीक है? तीन आवाज पढ़ने पे पीछे नहीं देखना चाहिए। चौथी आवाज पे देखना चाहिए। तो कई चीजें हैं पहले के देखिए पहले के चाहे हमारे बड़े बुजुर्ग ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे। लेकिन जो उनका अनुभव और ज्ञान था ना वो अता था। हम उनका ज्ञान अता था। उनके ज्ञान की सीमा नहीं थी। आज जितना हम जानते हैं, ठीक है? जितना हम समझते हैं, उससे ज्यादा तो आज हमारे बड़े बुजुर्ग जानते हैं। हम अच्छा इसका रीजन क्या है कि पीछे मुड़ के नहीं देखना है। मेहंदीपुर बालाजी की अगर हम बात करें। देखिए कारण यह होता है कि जब आप पीछे मुड़ के देखते हो वो कौन आवाज मार रहा है? भूत हो सकता है, प्रेत हो सकता है।

हम ठीक है ना? वो भी तो हो सकता है। अगर जैसे ही आपने पीछे मुड़ के देखा वो आपके साथ हो लिया। ओके। अच्छा मैंने यह भी सुना है कि वहां पर नाम लेकर भी नहीं पुकारना चाहिए। हां। क्योंकि वो कह रहे थे कि उसी फॉर एग्जांपल अगर किसी किसी का नाम रोहित है और रोहित नाम की आत्मा अगर वहां घूम रही है और उन्होंने रोहित बोला तो वो आत्मा हमारे साथ लग जाती है। नहीं ऐसा नहीं है। ठीक है। बिल्कुल ऐसा नहीं है। अब किसी को बुलाना है। आप या तो आप अपने ईस्ट पे भरोसा रखो। हम है ना? Karnpisachini Brahmarakshah aur

तो अब आपको कोई बुलाना चाहेगा, आपकी माताजी बुलाना चाहेंग तो नाम से ही बुलाएंगे ना। है ना? लेकिन अगर वो बंधी हुई है, परेशान है लेकिन पीछे मुड़ के अगर कोई आवाज मारता है तो वो नहीं देखना चाहिए। आप नाम से बुला लो। है ना? आप ओए करोगे तो 50 लोग देखेंगे। ओए करोगे तो 50 प्रेत नहीं देखेंगे। जी जी। बात को समझ गए तो फिर 50 आ जाएंगे। जी। एक लॉजिकली बात तो यह है। जी अभी जैसे हमने हनुमान जी की बात करी है। एक और हनुमान जी का रूप है जो आई थिंक काफी लोगों को नहीं पता है। मरगट के हनुमान जी मैं इसके बारे में जानना चाहती हूं। मरगट या हनुमान जी मरगट यानी मसान श्मशान वो वहां के हनुमान हैं।

उग्र हैं वो। हम कालिया हनुमान के नाम से भी जाने जाते हैं। ठीक है। इनकी सेवा में कौन रहता है? इनके चरणों में कौन रहता है? भूत, प्रेत, पिशाच, ढक ये सब एंटिटी इनकी सेवा करते हैं क्योंकि मरघट में रहते हैं ये। ठीक है? शमशान इनके अधीन होता है। ठीक है? ये सीधा चलाते हैं सबको। ठीक है? कोई गलत नहीं कर सकता इनके होते हुए। इसलिए इन्हें गालियां हां देखिए आप एक चीज समझिएगा। आप एक नॉर्मल हैं। Karnpisachini Brahmarakshah aur

आप गृहस्थ में रहते हैं। सब कुछ रहते हैं। जो तंत्र साधक होते हैं ना जो आप नॉर्मल में भगवान पूजते हो। इसी प्रकार हमारे तंत्र में वो भगवान तंत्र के रूप में पूजे जाते हैं। उनकी ऊर्जा, उनका रूप, उनकी कार्य करने की शैली सब अलग हो जाती है। क्योंकि तंत्र है एक रहस्यमय उग्र। ठीक है? वह ऑटोमेटिकली चीजें बदल जाती हैं। अब आप लोग करते हैं गणेश जी की पूजा, विघ्न हर्ता है ना? यहां हमारे में आ जाते हैं उच्चिष्ट गणपति। हम अोर गणपति, महाकाल गणपति। आप अोर गणपति के बारे में बताइए क्योंकि यह टॉपिक आई थिंक बहुत सारे लोग इस के बारे में जानना चाहते हैं लेकिन इंफॉर्मेशन ज्यादा अवेलेबल नहीं है। ये एक अोर का अघोर एक वाम मार्ग है। ठीक है? Karnpisachini Brahmarakshah aur

ओघड़ है। तो ये रहस्यमय दुनिया है अघोरों की ना। कब क्या कहां क्या करते हैं कोई नहीं जानता। किस लिए करते हैं कोई नहीं जानता। अघोर यानी स्वयं में शिव। ओगढ़ दानी कहा जाता है इनको। यह देना जानते हैं, लेना नहीं जानते। ठीक है? लेकिन इनसे दूरी उचित ही रखनी चाहिए। हम क्यों? ये अपने ईस्ट में रमना पसंद करते हैं। इन्हें ईस्ट के अलावा कुछ नहीं भाता है। गुरु और ईस्ट इन्हें दो ही सानिध्य समझ आते हैं। तीसरा कुछ नहीं आता। इन्हें इन्हें छेड़ना नहीं चाहिए। हम हां जो ओघड़ दानी हो वो अपनी ही मौज में रहता है। Karnpisachini Brahmarakshah aur

उसे मतलब नहीं है। कोई लेने आएगा तो उसे जरूर कुछ ना कुछ देके भेजेगा। अब ये सामने वाले पे निर्भर करता है वो उससे लेता क्या है? वो बातों में भी इतना दे देगा कि आपका जीवन सुधर जाए। जो हम घर में गणपति की पूजा करते हैं और जो अघोर गणपति है उन दोनों में डिफरेंस क्या है? एक तांत्रुक गणपति है। ठीक है? एक नॉर्मल गणपति है। तांत्रुक गणपति में कोई हमारी जैसे सेवा होती है उसमें जिस प्रकार से साधना गुरु बताएगा हम उस प्रकार से करेंगे। जो भोग बताएगा हम वो भोग चढ़ाएंगे। ठीक है? किस हिसाब से उनकी सेवा करनी है, कैसे करनी है Karnpisachini Brahmarakshah aur

वो सब बताएंगे। लेकिन आपके में आपने आरती करी, उनका जाप किया, उनका स्त्रोत्र किया खत्म। हमारे में 30-40 प्रकार के तो भोग ही हो जाएंगे। हवन किस प्रकार करना वह भी वही बताएंगे फिर गुरु जी कि यह नियम है एक अंतर्गत आता है तो अोर गणपति जो हैं वो वाम मार्गी हम है ना अोर में तो कुछ भी किसी भी चीज से नफरत नहीं जैसे सबसे प्रेम है आपने भी भोग की बात करी है तो आप बता सकते हैं कि भोग में क्या चढ़ाया जाएगा देखिए ये निर्भर करता है कि आप अघोर गणपति को जो जगा रहे हो किस कार्य के लिए जगा रहे हो हम किस कार्य के लिए उनका आह्वान कर रहे रहे हो। ठीक है ना? तो यह निर्भर करता है। उग्र रूप में कर रहे हो अोर गणपति को या उन्हें शांत रूप में मनाने की कोशिश कर रहे हो या उनसे कुछ पाना चाहते हो या सिर्फ सेवा कर रहे हो। ठीक है? Karnpisachini Brahmarakshah aur

और इनकी अगर मैं आपको फोटो शेयर कर दूं अगर आपने डालनी हो कभी तो कई जगह पे ये मुंडों पे विराजमान है। हम मुंड समझ गए आप? जी। ये उन पर विराजमान है। अोर गणपति वो तो इतना ही बहुत है। जी जी जी अच्छा अभी हमने हनुमान जी की बात करी थी। दिल्ली में मरगट वाले हनुमान जी का मंदिर है। क्या वो मरघटिया हनुमान जी ही हैं जो आपने बताया है? बिल्कुल। ओके। तभी उन्हें मरघटिया मरगठ हनुमान जी का मंदिर कहा जाता है। ऐसा भी कहते हैं कि उस मंदिर में भूत पूजा करते हैं हनुमान जी की। ऐसा कुछ है? Karnpisachini Brahmarakshah aur

नहीं हम ऐसा नहीं है। हनुमान जी देखिए हनुमान जी से आपको अगर हनुमान जी का आपने विग्रह देखा है। हनुमान जी के बारे में आपको थोड़ी सी जानकारी है तो आपको क्या लगता है हनुमान जी कौन है? राम जी के दास हैं। हनुमान जी शिव जी के रूप हैं। ठीक है। वो परम भक्ति सिखाते हैं। जी ठीक है। अगर भक्त के स्वरूप में देखना हो तो दो स्वरूप मैं बता देता हूं। एक प्रह्लाद पालका है और दूसरे हनुमान जी। हम प्रह्लाद बालकाय ने भक्ति से नरसिंह देव को प्रसन्न कर दिया। विष्णु को भगवान ठीक है नरसिंह देव के स्वरूप में आने पर मजबूर कर दिया। वो भक्ति ठीक है। और हनुमान जी ने ठीक है? श्री रामचंद्र जी को जो भगवान विष्णु के ही स्वरूप है उन्हें प्राप्त कर दिया भक्ति से।

ठीक है? चिरंजीवी हैं हनुमान जी। ठीक है? तो वह भक्ति का भाव है ना जो उन्होंने क्या किया राम राम राम उन्हें राम में ही सब कुछ प्राप्त हो गया हम जी वो भक्ति की जो सीमा है वो आपके अंदर होनी चाहिए जागनी चाहिए आप शिव शिव शिव से भी शिव को प्राप्त कर सकते हैं प्रह्लाद पालकाई जी ने क्या किया था हरि हरि विष्णु भगवान हरि हरि हरि हरि हरि इसमें भी हरी, उसमें भी हरी, तुझ में भी हरी, मुझ में भी हरी। लोग इसे क्या समझेंगे अब? पागलपन। तो पागलपन वही करता है जो उसे प्राप्त कर लेता है। हम समझदार तो अक्सर कहता है ना धोबत्ती करी, काम पे जा रहा हूं, लेट हो रहा हूं। जो पागल होगा वो वहां से उठेगा ही नहीं। जी अ सर मैं ना एक बुक रीड कर रही थी।

उस बुक का नाम ही अगोरा था। सर उस बुक में मैंने शव साधना के बारे में इंफॉर्मेशन दे रखी थी। सर मैं आपसे पूछना चाहती हूं शव साधना होती क्या है? पहले आप यही बताइए। देखिए ये बहुत रहस्य में है। ठीक है ना? ये आपने पढ़ा या किताब में जिसने लिखा। ठीक है? वो तंत्रशास्त्र की तो नहीं होगी। है ना? किसी ने अोर के बारे में जानना चाहा। उस पद्धति को जानना चाहा। उसने उस पर रिसर्च किया और किताब में डाल दिया। तो इसका तो अगर देखा जाए तो इसका तो विच्छेद होना चाहिए कि आप उस नियम को आप सार्वजनिक नहीं कर सकते जैसे शिव ने खुद नियम से में बांध रखा है। ठीक है? तो एक तरह की साधना होती है जो अघोर मार्ग में है ना वामाचार मार्ग में अंतर्गत आती है।

ये समय था। होती थी। अब जैसे-जैसे समय बदलता जा रहा है, चीजें बदलती जा रही है, साधना पद्धति बदलती जा रही है। ठीक है? आज के समय में शव कहां से लाओगे साधना करने के लिए? हम कहां से लाओगे? नहीं ला सकते। पहले के समय में समय कुछ और था। साधनाएं कुछ और थी। अब साधनाएं भी देखिए पहले के गुरुओं पे जो ज्ञान था ना और जो शक्तियां थी, जो सिद्धियां थी आज आज उसकी 10% भी नहीं है। हम पहले आपने सुना होगा वायु गमन सिद्धि जल विचरण सिद्धि जल पे चलना अग्नि सिद्धि जी हम वाक सिद्धि स्वपन सिद्धि और आज कितनी है

हम जी तो सर जैसे बोला जाता है कि जैसे हम शव साधना की बात कर रहे हैं तो शव के ऊपर बैठ बैठकर वो साधना होती है। तो सर क्या सच में शव खड़ा हो जाता है साधना के समय? मंत्र देखिए जब उसके ऊपर मंत्र जाप किए जाते हैं तो एक समय ऐसा आता है वो बैठ जाता है। अच्छा वो ताकत है। मंत्रों में इतनी ताकत है। मंत्रों में इतनी ताकत है कि वो ब्रह्मांड को भी रोक सके। ताकत है लेकिन उस ताकत के साथ जुड़ने का आपका भाव भी तो होना चाहिए। खाली माला घुमाने से मंत्र नहीं जुड़ता है। चलता नहीं है।

आपको अपनी ऊर्जा को उस मंत्र की ऊर्जा में विलीन करना आना चाहिए। हम तो यह कार्य करता है। किसी भी प्रकार का कार्य हो। खाली साधना में नहीं। आपको शांति चाहिए तो शांति मिलेगी। आपको पैसा चाहिए पैसा मिलेगा। आपको ज्ञान चाहिए ज्ञान मिलेगा। लेकिन उस ऊर्जा के साथ मंत्र की ऊर्जा के साथ आपकी ऊर्जा का विलीन होना बहुत जरूरी है। हम मंत्र तो कोई भी पढ़ता है। आप भी करते होंगे सुबह उठ के। जी। तो सर ये जैसे शव साधना की ही बात है। ये करी क्यों जाती है? इसका एंड गोल क्या है? एक तो देखिए जो शव है उसको भी मोक्ष की प्राप्ति देने के लिए।

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अघोर में इतनी ताकत होती है, अवघड़ में इतनी ताकत होती है। वह किसी को भी मोक्ष की प्राप्ति के लिए सहायता कर सकता है। पहली चीज। दूसरी चीज अपनी सिद्धियों के लिए, अपनी ऊर्जा को और चरम पे ले जाने के लिए, परम तत्व को पाने के लिए। ओघड़ और अघोर क्या है? पहले यह समझो। जिससे समाज घृणा करता है ना वो उससे प्रेम करता है। हम जो समाज के दायरे में नहीं आता वो उस दायरे को पार करता है। क्योंकि ओघड़ को सिर्फ एक ही चीज सिखाई गई है देना। इसलिए ओघड़ दानी ही कहा गया है शिव स्वरूप को। ठीक है? और वो प्रेम प्रेम करता है हर एक चीज से। जिससे लोग घृणा करते हैं वो उसे अपनाता है। वो अवस्था होती है बच्चे वाली। ठीक है? वो अवस्था कैसी होती है?

बच्चे वाली क्यों बच्चे को आप कहोगे यह गलत है उसे समझ नहीं आएगा करेगा बच्चे को आप कहोगे यह सही है उसे समझ नहीं आएगा उसे आनंद आ रहा है उसमें वो प्रेम दे रहा है बच्चा ही एक ऐसा होता है ठीक है जो प्रेम देता है हम बदले में आपसे कुछ नहीं मांगेगा लेकिन जिद्दी बहुत होता है ओघड़ भी जिद्दी बहुत होते हैं अगोर अपनी भी अगर उनकी कहीं अटक गई बुद्धि तो वो वहां अटक गई बिल्कुल सेम टू सेम सर इस साधना में क्या देवी मां दर्शन देती हैं? लास्ट में जब ये साधना पूरी कर ली तो क्या माता दर्शन देने आती हैं? वो स्वयं में ही वास करने लग जाती है। तो दर्शन की क्या अभिलाषा? हम जब वो परम तत्व को पा लेता है तो आपकी ऊर्जा उस भगवती के चरणों में विलीन हो जाती है। वो साथ रहती हैं। अनुभव होते हैं। जो अनुभव होते हैं वो शब्दों में बया नहीं होते हैं। ठीक है? ये दर्शन तो सिर्फ मात्र एक क्षण भर का है

आनंद लेकिन जब उसका आशीर्वाद से वो वो साथ रहने लगते तो परम तत्व पे मोक्ष की प्राप्ति समझो हो जाती है हम यहां भेद है लोग दर्शनों में अटके हुए हैं दर्शनों से आगे बढ़ो उसके चरणों तक पहुंचने का मार्ग ढूंढो हम आज मैं यहां बैठा हूं कल नहीं होऊंगा हो गया लोग पडकास्ट देखेंगे देख लिया खत्म हो गया दोबारा वेट करेंगे करेंगे आने का कब आएगा कब नहीं आएगा ठीक है लेकिन वही चीज आशीर्वाद के रूप में साथ होती है तो कैसा आनंद आता है हम जिसे आप सबसे ज्यादा प्रेम करते हो जिसके लिए आपने जीवन को लगा दिया फिर कैसा लगता है वो शब्दों में कहने लायक रहता ही नहीं है वो जी जी सर अघोरीस की जब बात होती है तो बोला जाता है कि अघोरी इंसानों का भी मांस खाते हैं हम ये सच बात है ये एक अवस्था होती है। वो अवस्था जो वो उस समय उसमें लीन होता है।

मांस खाने का अर्थ यह नहीं है उसने मनुष्य का मांस खाया। उसका खाने का अर्थ यह होता है कि सब एक समान है। ये मांस शरीर खत्म हो चुका है। हमारा भी यही होगा। वो एक अवस्था है। इसे फैलाया गलत गया है। मतलब वो खाते हैं। ओके। उन्हें मतलब वो यह नहीं करते कि ये इंसान का मांस है या तो घृणा शब्द उनकी उससे हट जाता है। मोर मल मूत्र से भी घृणा नहीं करता है। उसे बदबू खुशबू में कोई फर्क नहीं पता होता। सब एक समान है उसके लिए। वह उसके लिए सत्य सिर्फ एक ही है हम शिव शक्ति उसके लिए परम सत्य एक ही है

भस्म हम भस्म लगाने का अर्थ यह होता है शरीर पे कि वो हर रोज उस चीज को याद करता है कि हमने भी एक दिन इसी में जाना है। वो अपने सत्य को अपनी आंखों से देखता है। भस्म का अर्थ यह नहीं होता है कि हम किसी को डरा रहे हैं। हम किसी को बता रहे हैं। वह स्वयं की चेतना को जागृत रखता है कि हम भी ऐसे ही एक दिन पड़े होंगे। हम ओके ओके सर जब हम एंटिटीज की बात करते हैं तो एक टर्म आता है कच्चा कलवा। सर मुझे खुद भी इसके बारे में कोई इतनी पता नहीं है। आप बताएंगे यह क्या है? कच्चा कलवा एक बच्चा होता है। ठीक है? जो अल्पायु में देह त्याग गया और हमारे सनातन संस्कार के हिसाब से सनातन धर्म के हिसाब से बच्चों को जलाया नहीं जाता। हम ठीक है?

उस शव को गाड़ा जाता है। यही है। जी। ठीक है। तो ये कच्चा कलवा वही बच्चे वो तांत्रिक बनाते हैं। जो सिद्ध होते हैं। ओके। हम तांत्रिक इनको सिद्ध करते हैं। हम तो ये वो कच्चा कलवा बनते हैं। सबसे खतरनाक होते हैं तंत्र में। ओके। सबसे खतरनाक। इसका रीज़ बच्चा है। हम और बच्चे पे कोई जल्दी से घात नहीं करता। देवी देवता। मां के लिए बच्चा बच्चा होता है। बच्चों का काम क्या होता है? शैतानी करना। किसी भी प्रकार की शैतानी करें। और उसने मां के आगे रोक दिया। ठीक है? या मां की गोदी में जाकर बैठ गया तो मां वहीं शांत हो जाती है। हां।

तो कौन रोकेगा बच्चों को? इसलिए इन्हें सबसे खतरनाक कहा जाता है। ओके। ओके। आप कोई रियल केस बताएंगे आपका इस एंटिटी के साथ कुछ? ऐसा मेरा कोई इसके साथ रियल केस तो नहीं है। बट जिनके सानिध्य में हम रहे थे। हम ठीक है। हमने इनके दर्शन जरूर करे थे। इतना कहूंगा। दिखने में कैसे होते हैं ये? वो था रक्त कलवा। ओके। रक्त में पूरा सा हुआ। तो इन्हें कई प्रकार के कच्चा कलवा रक्त कलवा, मसानी कलवा। हम ठीक है। कई प्रकार के होते हैं। वो रक्त कलवा था। पूरा रक्त में सना रहता था। मतलब उसे देख के भी हम भी कई बार कहते थे इतना भयंकर महाराज जी कहां ले चलते रहते हो इसको। हम ओके। ऐसे दूर ही रखा करूंगा थोड़ा सा। दिखने में काफी डरावने होते हैं। बहुत डरावना होता है। आप किसी चीज को पूरा रक्त में लिखते हुए देखोगे कैसा लगेगा?

हम कमजोर दिल वाला तो बेचारा वैसे ही ये वो चीज है। ओके। सर जब हम हमने मूवीज में काफी देखा है ये चीज कि जब भी ब्लैक मैजिक की बात होती है तो एक वुडू डॉल बना दी जाती है और उसको पिन मारी जाती है और जिस इंसान की वो डोल होती है उसको वहां पर पेन होता है ये सच में होता है वुडो ये आया कहां से ये अफ्रीकन जलन था हम ठीक है ग्रामीण विद्या है वहां की ठीक है और जो करते हैं वो भी किसी ना किसी रूप में जो ग्रामीण देवी को पूजते हैं वो ठीक है और ये बहुत खतरनाक होता है।

अभी तो इतना अच्छे से इसके बारे में कोई नहीं जानता है। ज्यादा जानकारी नहीं है। बहुत कम लोग करते हैं। ठीक है? लेकिन अब कोई अपने तरीके से करता है। लेकिन वुडो जो पर्टिकुलर वुडो होता था। ठीक है? उसमें फोटो को लगाना अंदर। ठीक है? साथ में मांस रखना। ठीक है? साथ में वस्त्र रखना, बाल रखना कई चीजें होती थी। फिर उसे बांधा जाता था मंत्रों के द्वारा। ठीक है? तो जिस पर्टिकुलर हिस्से पे वो सुई लगती थी उसे वहीं पे हम ओके बहुत भयंकर रहता है। कोई रियल केस बताएंगे आप काले जादू का जिसमें ऐसा ही करा हो किसी के साथ कई बार होता है।

ठीक है। अभी हमारे पास कोई आया था तो बात हो रही थी तब उनका कुछ अटकी हुई थी चीजें। तो उनकी चीजों को ले गार्ड रखा था मसान में। ठीक है? ग्रंथ गाड़ना जिसे कहते हैं। हम आपकी एक ग्रंथ बना दी गई। पोटली बनाई गड्ढा खोदा। शमशान में जो भी पेड़ होगा उसके नीचे दबा दी जाएगी। हम जड़ के अंदर। फिर उसका आनंद लो। फिर वह बेचारा पूरी जिंदगी क्योंकि यह जल्दी से पकड़ में नहीं आती है। परेशान घूमेगा। यह चीजें होती हैं।

इसलिए कहते हैं सावधानी हमेशा रखनी चाहिए। हर सनातनी को अपने ईस्ट अपने कुल की सेवा करते रहना चाहिए। नियमित दो टाइम ज्योतबत्ती लगाते रहना चाहिए। अपने ग्रहों को प्रबल रखना चाहिए। जिनके ग्रह प्रबल होते हैं उन पे तंत्र जल्दी काम नहीं करता। और दूसरी चीज सबसे विशेष ठीक है? तंत्र शास्त्र के अनुसार अपनी कुंडली भी हर एक को नहीं दिखानी चाहिए। हम अगर वह आपकी ग्रहों की चाल जानता है तो जब आपका कोई ग्रह वीक होगा तो वो आपको पलटेगा सामने वाला। ओके। हम और वैसे ये बहुत महत्वपूर्ण जानकारी है। मैं पहली बार दी बात हुई तो कि अपनी कुंडली एक अच्छे पंडित को हमेशा रखें। ज्योतिषचार्य को रखें जो आपका एक पर्टिकुलर फैमिली से जुड़ा हुआ हो।

चेंज नहीं करने चाहिए बार-बार आपको और हर समय भी कुंडली नहीं दिखानी चाहिए। ओके सर मेरे पडकास्ट में उन्होंने बताया था कि एक इंसान की गुड़िया बनाई गई थी। उसके ऊपर शहद डालते थे एंड देन चींटियां उसके ऊपर दौड़ाते थे। तो जो इंसान है उसको बहुत परेशानी उसको लगता था पूरे शरीर में उसकी चींटियां हां होता है। बिल्कुल होता है ये। ठीक है? इसमें आटे की गुड़िया भी बनाई जाती है। हम ठीक है? आटे की गुड़िया बनाई जाएगी। ठीक है? उसके अंदर 25 प्रकार की चीजें भरेंगे। ठीक है? जैसे भूत दाना, रेत दाना, जिन्नात दाना। ठीक है? ये आज तक मैंने नहीं बोला।

चलो आज मैं बता रहा हूं। ये चीजें भी भरी जाती है ताकि वो उसकी सोल वीक होती रहे। हम ठीक है? वो मेंटली डिस्टर्ब होने लग जाए। लेकिन मैं एक ही चीज जानता हूं। अगर मैं गलत कर रहा हूं। मैंने किसी के लिए गलत किया, गलत सोचा। आज नहीं, कल नहीं, परसों नहीं, इस जन्म में नहीं। तो अगले जन्म में इसका खामियाजा मैं जरूर भरूंगा। राइट? चाहे मैंने जितना मंत्र जाप किया हो। मैं भरूंगा और 100% भरूंगा। ओके। तो बचाएगा कौन? मेरा कर्म मुझे बचाएगा। आज आपके पडकास्ट से एक और चीज कहता हूं। कभी नहीं कहा कुछ चीजें नहीं है।

आप पैसा साथ ले जा सकते हो? नहीं। नहीं ले जा सकते। अगर मैं उसे साथ ले जाने का रास्ता दे दूं आज। ओके। आप पैसे को इनकैश कर सकते हो। साथ ले जा सकते हो। आपके पास उदाहरण के तौर पर ₹100 हैं। उसमें से ₹20 आपने अच्छे कर्म में लगा दिए ना। पक्षियों को दाना दे दिया या किसी जरूरतमंद की हेल्प कर दी या किसी ने भंडारा करवाते हैं तो अच्छे कर्म इन कैशों के साथ जाते हैं। जी तो पैसे को कैश करने का भी तरीका होता है। साथ ले जाने का भी तरीका है। हम आपने उसे सही कर्मों में लगाया है तो आपका कर्म आपके साथ जाएगा। जी जी सर जैसे अभी हमने ब्लैक मैजिक की बात करी है। सर आप यह बताएंगे कि एक इंसान के ऊपर ब्लैक मैजिक हो रखा है।

इसके क्या लक्षण हैं? इसके लक्षण मैंने पहले भी कई बार बताए हैं। ठीक है? मैं फिर बता देता हूं कि डॉक्टरी रिपोर्ट जब कराते हैं, नॉर्मल आएगी। ठीक है? लेकिन बीमारियां शरीर से नहीं जाएंगी। हम ठीक है। गुस्सा हर समय रहेगा। सुनना पसंद नहीं करेगा सामने वाले की बातों को। आंख मिलाकर बहुत कम बात करेगा। ठीक है? और कहीं ना कहीं उसे एक अजीब सी स्मेल आसपास आती रहेगी। उसे ऐसा लगेगा कोई

आसपास से गुजरा है या कोई साथ में खड़ा है। और कईयों को तो ऐसा भी महसूस होगा कि उनकी चेस्ट पे कोई बैठा हुआ है। कोई गला दबाने की कोशिश कर रहा है। और कईयों के थाई पे नील के निशान पड़ जाएंगे। हम ठीक है? तो ये सारे लक्षण होते हैं। ओके। नीचे पैरों में दर्द रहना। ठीक है? और पेट एकदम टाइट रहेगा हम कई बार। लेकिन डॉक्टर ही जब रिपोर्ट करवाएंगे अब वो एकदम नॉर्मल आएगी। ओके। ओके। तो इसको इसी तरीके से पकड़ा जाता है। ठीक है? नॉर्मल इंसान के लिए।

ओके। सर हमने एंटिटीज की बात करी है। एक और टर्म आता है भ्रम राक्षस। मैं आपसे सीधा यही पूछूंगी कि आपका कोई एक्सपीरियंस है अगर आपका आमनासामना हुआ हो, आपने बात करी हो या आपका कोई भी एक्सपीरियंस? इसकी मैं एक स्टोरी पहले बता चुका हूं। हम मेरा अपना आमनासामना नहीं हुआ है। ठीक है? बट जिसका हुआ था जिसके साथ था उसका रात को ही कॉल आया था मेरे पास। ओके। ठीक है। एक लड़का था पुणे में जॉब करता था। वो जिस घर में रहता था उस घर में था। हम ठीक है। वो उस घर में था। अब वो क्या करता था? वो जिस दिन पीता था उस दिन उसे बहुत मारता था। लिटरली मारता था गालों पर उंगलियों के निशान सब कुछ मतलब वो और वो पूरे दिन मतलब फिर उसने पीनी जैसे ही छोड़ी वो पूजा के कमरे से बाहर नहीं निकलता था। हम वहां अपने आप को जोत लगा के बैठा रहता था।

तो रात्रि में एक दिन उसकी खूब उसने फिर पार्टी चल रही थी बर्थडे की। अच्छे से क्लास लगाई थी। तो फिर हमने उसे रास्ता दिया ऐसे ऐसे निकल ऐसे ऐसे निकल और दोबारा पुणे की तरफ देखियो मत ओ नहीं हटता इसे यहां हम लोग भ्रम राक्षस के नाम से जानते हैं। आप महाराष्ट्र में जाओ मुंजा के नाम से जाना जाता है। ओके हम ठीक है। इन्हें काबू में रखने के लिए एक वेद छड़ी आती है। वेद छड़ी आती है। हम लाए नहीं तो दिखा देते। तो उनसे यह बहुत डरते हैं। अच्छा सर मैंने यह सुना है कि ब्रह्म राक्षस सबसे ज्यादा शक्तिशाली एंटिटीज हैं। जितनी भी

एंटिटीज हैं भूत प्रेत ये जितने भी हैं सबसे टॉप पर ब्रह्म राक्षस होते हैं। बहुत पावरफुल है। ऐसा नहीं है। बहुत पावरफुल है। अच्छा इनसे भी पावरफुल हैं। इनसे भी पावरफुल है। ओके। योगनियां हैं। ठीक है। डार्कनिंग है। लेकिन ये भी अपने में बहुत ताकतवर होता है। यह मंत्र भी बता देते हैं कि तुम क्या मंत्र बोलोगे? ब्रह्म राक्षस यानी जो ब्राह्मण है जिने संस्कार से पहले चला गया या जिने संस्कार के 10 दिन में जाता है या फिर जिसने कार्य ही एक भ्रम ब्राह्मण परिवार में होके हम भ्रम तत्व का पालन नहीं किया उस ज्ञान का पालन नहीं किया उस वेदों का पालन नहीं किया ठीक है उसके अनुचरण में नहीं चला उसने सब गलत कार्य किए वो एंटिटियां बन जाती हम ओके। इसलिए वो

मंत्र बोलने में सक्षम होता है। हां जी। अच्छा सर एक और एंटिटी है। वो बोलते हैं कि वो इतनी पावरफुल है कि वो कुछ भी लाने में सक्षम होती है। डेढ़ फुटिया बोलते हैं। आई थिंक ये ये आजकल बहुत चल रहा है। सबसे पहले हमने इसका बताया था डेढ़ फुटिया का अगर आपने सुना होगा हमारा पडकास्ट। तो वो उस पॉडकास्ट से इतना डेढ़ फुटिया चला कि इसकी साधनाएं भी होने लगी जो साधना होती नहीं। ठीक है? कि 1ढ़ फुट या 24 घंटे में सिद्ध करो। अच्छा लोग यह भी कर रहे हैं। हां, यह भी करने लग गए हैं। इसकी कोई साधना नहीं होती है। पाताल की एंटिटी है। ठीक है? पाताल में रहती है। और ये बहुत पावरफुल होती है। एक्चुअली इसका मोस्टली काम क्या होता है? जैसे ये टेबल है ऑफिस में।

हम ये इसको उठा के अगर आपको कहीं पर रखवाना है हम कहीं पर भी तो रातोंरात यूं गायब करेगा और रख देगा। हम ये वो होती है 1ढ़ फुटिया ओके ये सम्मान को ना यहां से वहां करता है मोस्टली तो देखिए पहले के समय में लोगों ने सिद्ध किया हुआ था इसे अब कई लोग तो कहेंगे देखिए जो अल्पज्ञान रखता है ठीक है कहीं कुछ रील पे आके कोई कमेंट कर देता है कोई कुछ कह देता है आप अगर किसी क्षेत्र में हो आप मैनेजर हो तो मैनेजर के बारे में मैं नहीं जानता हूं है ना मेरे को पता ही नहीं है तो मैं क्या जवाब दूंगा? मैं कुछ भी लिख के आ जाऊंगा। हम ठीक है?

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Rudranath Ji Maharaj Aghori Sadhana Guide

तो 99% आजकल लोग यही करते हैं। जिन्हें इस चीज का ज्ञान नहीं है, वो कुछ भी आके कमेंट करते हैं। कुछ भी रील टैग करते हैं, कुछ भी कहीं भी बनाते हैं और डाल देते हैं। लेकिन उन मूर्खों को इतना समझ आना चाहिए कि अगर हम कुछ शब्दों का उच्चारण भी कर रहे हैं ना, कुछ लिख भी रहे हैं तो वह कर्म का हिस्सा है। कहीं ना कहीं भुगत के तुम्हारे ऊपर आएगा। इसलिए वाणी को भी बड़ा नियंत्रण में रख के बोलना चाहिए। हम जी जैसे आपने कहा वो कोई भी सामान उठाकर कहीं भी रख सकते हैं। तो अगर उनसे पैसों की डिमांड की जाए 1ढ़ फुटिया वो वो भी कहीं से भी लाकर आपको दे देगा। आप बताएंगे चीज बताएंगे। यहां इतना है वो कर देता है। ओके। पहले करता था। तो सर 1ढ़ फुटिया का पॉलिटिक्स में भी यूज़ होता है। इसका तो पता नहीं कि पॉलिटिक्स में यूज़ होता है या नहीं। बट पहले के समय में इसका उपयोग ऐसे किया जाता था।

है सामान इधर से उधर करना। ठीक है? ये हड्डी के स्वरूप में भी मिलता था। हम ठीक है? ये दो स्वरूपों में पाया जाता है। दूसरा मैं नहीं बताऊंगा। ओके। हां। कारण क्या है कि फिर वो ज्यादा हो जाएगा। फिर कोई ना कोई पडकास्ट में आके फिर वही चलाएगा। जी। ठीक है ना? तो यह आगे बढ़ जाती हैं। कुछ चीजें मैं इसलिए नहीं बोलता हूं क्योंकि वह चीजें आगे फिर बढ़ने लगती हैं और फिर वह नियम का खंडन होता है। सर जैसे अगर हम सिर्फ डेढ़ फुटिया की बात ना करें वैसे क्या इन इविल एंटिटीज का पॉलिटिक्स में यूज़ होता है?

देखिए इविल्स का तो पता नहीं। बट हां कहीं ना कहीं अपनी साधनाओं से ठीक है? अपने आप को पॉजिटिव रखने के लिए मोस्टली लोग हवन करवाते हैं कि मेरे पे कोई भी आज हम हैं हम भी हवन करते हैं अपने लिए कि हमसे नेगेटिविटी दूर रहे हमसे लोग दूर रह है ना हम कोई गलत लोग नहीं आना चाहिए तो ये लोग ऐसा करवाते हैं सभी करवाते होंगे ओके जैसे कि ब्लैक मैजिक हो गया ये चीजें देखिए मेरे को तो इस बारे में इस इतना आईडिया नहीं है कोई करवाता होगा तो वो बताएगा क्या हां राइट पहली बात तो ये ठीक है

हमारे पास पास अगर कोई आया है तो उन्होंने यही कहा है कि हमारा अच्छा रहे लेकिन हमारे पास स्पेशली यह नहीं आया कि हमें यह काला जादू करवाना है करवाना क्योंकि ना हम किसी का गलत करते हैं ना करना पसंद आज आप मेरे को ₹00 लाख 10 लाख 5 लाख दे दोगे कितने दिन चला लूंगा कर्म तो साथ ले जाऊंगा ना गलत करते ही उसी 5 लाख 5 लाख में कब देना पड़ जाएगा पता नहीं चलेगा जी जी जी सर यहां से मैं आपसे एक और टर्म पूछना चाहती हूं सर सर मारण क्रिया ये क्या होती है? ये तंत्र के षट कर्म के अंतर्गत आती है।

छह कर्म बताए गए हैं तंत्र के। उसके अंतर्गत मारण क्रिया होती है। मारण क्रिया यानी मारण का अर्थ क्या है? मारना किसी को। हां। ठीक है? तो मारने के लिए ये क्रियाएं चलाई जाती हैं। ठीक है? किसी व्यक्ति को मारना है। ठीक है? तो मारण क्रिया का लोग प्रयोग करते हैं। ओके। हां। लेकिन किसी को मारना ही क्यों? जीवन आपने दिया नहीं दिया मैंने दिया नहीं दिया हमें किसने दिया शिव शक्ति ने दिया है ना पालनकर्ता कौन हमारे विष्णु हरिहर है ना माता लक्ष्मी जब उन्होंने पाल रखा है ठीक है तो हमें स्वास दे रखी है ठीक है तो किसी को मारने का अधिकार हमें नहीं है अगर हम जीवन नहीं दे सकते तो मारने का भी अधिकार नहीं है जी सिंपल सी बात है जी अच्छा सर ये भी है

क्या कि अगर किसी के ऊपर मारण क्रिया करनी है तो उस इंसान की कोई ना कोई चीज हमारे पास होनी चाहिए। जैसे कि नाखून, बाल ऐसा कुछ हो तो बहुत जल्दी हो जाता है। नहीं तो लोग फोटो से या वस्त्र से काम करते हैं। ओ फोटो से भी कर सकता है। ओके बट आई थिंक ज्यादा हाई लेवल पे करने के लिए उसकी पूरा डीएनए का लाइक ब्लड का कुछ वो चाहिए होगा। वो मिल जाए तो बहुत तीव्र होता है। वही कह रहा हूं मैं। जो चीज 41 दिन में होनी है वो 21 में हो जाएगी। हम हम समझ गए? जी। तो ये चीज है। आपके पास कोई केस है? आया है

ऐसा जिसमें उसके ऊपर मारण क्रिया कर रखी हो और वो बचना चाहता हो? मेरे पास केस नहीं आया लेकिन मेरे पास कोई पूछने आया था। ओके। ठीक है? कि आप ये करते हो? तो हमने उसे एक ही जवाब दिया था। किसके लिए? तो कह रहे हमें किसी से परेशानी है। तो हमने उन्हें एक ही बात बोली। परेशानी आपकी समस्या आपकी। जीवन देने वाला वो। आप अपने लिए गड्ढा खोद रहे हो। कहीं आपका ना खुद जाए। सुनता है वो। बाकी आप समझदार हो। इतना बोला और हमने भेज दिया। क्योंकि हम दूसरे के लिए गड्ढा खोद रहे हैं। हम भी तो घेर सकते हैं खोदते-खोदते उसमें। पैर स्लिप हो गया। मिट्टी के लिए कुछ भी हो सकता है। पीछे से किसी चींटे ने काटा आपने ध्यान दिया और

पैर स्लिप हो रहा नीचे। जी। फिर तो गड्ढा नहीं खोदना चाहिए। ये गलत मैं सही में खोदो ताकि गिरो भी तो आप वापसी आओ। राइट सर एक मुस्लिम एंटिटी है। जिन बोलते हैं जिन जिन्नात सर आप बताएंगे ये क्या होता है? देखिए इनमें जिन जिन्नात ठीक है। जिन जो होगा वो अच्छा होगा। उसमें एक जिन होता है जाफर। हम वो अच्छा है। वो कभी किसी का बुरा नहीं करता है। बाकी जो जिन गलत करते हैं वो जिन नहीं होते हैं। वो खबीज होते हैं। ओ ओके। ठीक है? दिन बुरा नहीं करता है। यह खबीज बुरा करते हैं। ठीक है? और यह बहुत गलत एंटिटी

होती हैं। ये जब किसी पे लगाए जाते हैं, चलाए जाते हैं। अगर स्पेशली ये फीमेल्स के साथ जोड़े जाएं हम तो ये फीमेल्स का यौन शोषण करते हैं। हम ठीक है? जो बहुत ही गलत है। ठीक है? तो इनसे बचने के लिए सबसे अच्छा उपाय होता है विष्णु भगवान का वारा ये अवतार। अब उसकी सेवा करो। है ना? कभी जिन जिन्नात आसपास तो क्या आपके क्षेत्र में भी प्रवेश नहीं करेंगे? जी आपने देखा है कभी इन एंटिटीज को सर इस पर्टिकुलर एंटिटी को? आपको इन्हें देखना है तो मैं रास्ता भी बता देता हूं। ठीक है।

कोई मस्जिद हो पुरानी हो टूटी हुई हो वहां कोई नमाज ना पढ़ने जाता हो। लेकिन वहां फिर भी कोई बैठ के नमाज पढ़ रहा हो तो समझ जाना वो जिन है। ओके। अभी हमने जैसे इतने सारे डार्क एंटिटीज की बात कर ली है। मैं आपसे यह पूछना चाहती हूं कि जब हम हनुमान जी की बात करते हैं तो भूतों की बात भी होती है। सर कोई रियल एक्सपीरियंस बताएंगे जिसमें हनुमान जी वर्सेस कोई डार्क एंटिटी हो एंड देन आप बताएं कि ये ये हुआ एंड देन हनुमान जी ने बचाया है। देखिए एक जगह गए थे हम हम ठीक है ना? वहां पे डार्क एंटिटी यह कह सकते हैं कि बहुत डाक थी। ठीक है? और बहुत जिद्दी जो वचनों में चलाई गई। जितना मर्जी बोल लो वचन तोड़ने को तैयार नहीं। मर जाएगा लेकिन

वचन नहीं तोड़ेगा। तो तब हमने बजरंग बाण का प्रयोग किया। हनुमान जी के। ठीक है? वो बजरंग बाण का प्रयोग हवन करते रहे और जैसे हम पांच लोग थे। ठीक है? चार लोग पढ़ रहे हैं। बजरंग बाण एक हवन कर रहा है। और वह चारों पानी में उंगली घुमाते हुए बजरंग बाण पढ़ते जा रहे थे। पढ़ते जा रहे थे। पढ़ते 11,000 जाप करना था। ठीक है? और 11,000 हवन की आहुति थी। और जैसे ही वह पानी पिलाया गया जो उसे उल्टियां लगी हैं। क्योंकि शरीर जब बैठता है वह दो स्थान पर बैठता है प्रेत शरीर में नाभि में बैठ जाएगा पेट में। ठीक है? या नीचे के हिस्से में बैठता है। जब उसे पिलाया गया तो पानी क्या है? हमारे शरीर में 70% वैसे ही जल है। तो पानी सारी नसों में फैलता है। हम और जब उसे जलन हुई और जब वो निकला है तब उसने मुंह खोला है कि मैं वचन तोड़ता हूं और मैं जाऊंगा रास्ता बता रहा हूं।

हम मतलब कितना भी शक्तिशाली प्रेत है हनुमान जी के आगे वो। देखिए हार मान जाएगा। अगर आपने सच को पूज रखा है, हम सच को मानते हैं, तो कोई भी परेशान करने वाली बुरी शक्ति ज्यादा टाइम नहीं टिकती। बस रास्ता ढूंढना आना चाहिए। और देखिए, दूसरी बात यह है कि सबका अपना कर्म का एक फल होता है। जिसको जिस समय ठीक होना है, प्रकृति और नियति उसका रास्ता बना देगी। जी। ठीक है ना? कई लोग काफी समय से परेशान हैं। उनका रास्ता नहीं बन पाता है। क्यों नहीं बन पाता? प्रकृति नियति उस रास्ते पे अभी खोल नहीं पाई है। वो कर्म फल काटना भोगना बाकी रह गया है। तो हमेशा भगवान से यही प्रार्थना करता हूं मैं भी कि जिनके भी जो कर्म फल हैं जल्दी से कटे और इन चीजों से उन्हें छुटकारा मिले। ठीक है? और जो भी कर्म है वो काट के जाओ तो अच्छा है।

नहीं तो अगले जन्म में उसे आप कैरी करके साथ चलोगे ही चलोगे। जी। लोगों को अपनी कुंडलिनी जागृत करनी होती है और आजकल तो बहुत कोर्सेज चल रहे हैं इसके कि आप आइए सेवन डेज के कोर्स हैं। आपकी कुंडलिनी जागृत हो जाएगी। सर आप बताइए इतना इजी होता है और ये कैसे जागृत होती है? कुंडलिनी क्या है? पहले तो यह समझो और वो सोई कब थी जो जागृत करनी है। हम अगर आप श्वास ले रहे हो तो इड़ा, पिंगला, सुष्मना तीन नाड़ियां मुख्य बताई गई हैं। जी। श्वास ले रहे हो? चंद्र और सूर्य नाड़ी भी कहा गया है इसे। ठीक है? तो जो स्वास ले

रहे हो यही तो कुंडलिनी है। हम अगर कुंडलिनी परा आदि शक्ति है। अगर वो ही रुक जाए स्वास ही रुक जाए शिव शक्ति है एक तरह से तो क्या होगा? वो तो ऑलरेडी जागृत है। लेकिन उस पे मोह, माया, काम, क्रोध, लोभ की परत जमी हुई है। ठीक है? आज सबकी कुंडलिनी है। आप कहते हो जागृत है। ठीक है? तो उनका लोभ क्यों नहीं छूटता है या मोह क्यों नहीं छूटता है? ठीक है? सब में वही है। कुंडलिनी जागृत होने के बाद उसका ईस्ट का वास हो जाता है। ओके? उसके अंदर और जब ईस्ट का वास हो जाता है तो ईस्ट उसे सब कुछ देता है। उसे किसी के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ती, मांगने की जरूरत नहीं पड़ती। वो कुंडलिनी शक्ति है। कुंडलिनी हमारे नाभि में विराजमान होती है

और शिव हमारे सहस्त्र में विराजमान होते हैं। तो कुंडलिनी को जो बताया गया कि ऊर्जा को ऊपर उठाओ यानी शक्ति को ऊपर उठाओ और शिव से मिलवाओ। जहां जाकर सहस्त्र एक हो जाता है, शिव शक्ति एक हो जाते हैं। वह कुंडलिनी है। तो इसकी कोई प्रोसेस रहती है? बिल्कुल रहती है। आपको पहले तो आसनों का ज्ञान होना चाहिए। उसके बाद आपको स्वर ज्ञान होना चाहिए। उसके बाद आपको स्वासों का ज्ञान होना चाहिए। उसके बाद आपको बीज मंत्रों का चक्रों का ज्ञान होना चाहिए। उसके बाद कुंडलिनी का प्रोसेस होता है। ओके? और आज ऐसे ही कुंडली जागृत हुई। सबकी कुंडलिनियां जागृत हैं तो उन्हें जैसी जागृत है उन्हें वैसे ही रहने दे। भगवती सबका कल्याण करें।

हम तो वैसे कुंडलिनी जागृत में कितना टाइम लग जाता है? कईयों का जीवन भी चला जाता है। हम इतना मुश्किल है। ओके। कुंडलिनी जागृत होने का मतलब है आप साधारण इंसान नहीं है। आप देवतुल्य हो जाते हैं। तो ये भ्रम थोड़ा सा निकाल दिया आज। जी। जी सर अगर किसी का श्राद्ध किसी वजह से छूट जाए तो उसका क्या प्रायश्चित हो सकता है? मतलब किस वजह से छूट जाए? अर्थात करना भूल जाए या कोई भी इमरजेंसी आ गई है छूट गया तो अब इसका क्या प्रायश्चित किया जाए? उसे कर सकता है। वो दोबारा उस श्राद्ध को करें। अमावस्या वाले दिन जाके करें। है ना? अगर पितृ पक्ष में नहीं हो रहा। एक दिन छूटेगा, दो दिन छूटेगा। पितृ पक्ष तो अभी लंबा चलेगा। किसी भी दिन जाके कर सकता है।

Karnpisachini Brahmarakshah aur

वैसे जो तिथि है उस तिथि पर करें तो ज्यादा अच्छा है। ओके हम ओके और सर त्र्यंबकेश्वर काशी रामेश्वरम यहां पर श्राद्ध क्यों किया जाता है क्योंकि ये मुख्य स्थान बताए गए हैं श्राद्ध के लिए गया भी जिसमें से एक मुख्य है हरिद्वार भी एक मुख्य है ना रामेश्वरम भी है ना ये मुख्य स्थान है जहां उन्हें वाराणसी है जैसे मोक्ष का द्वार बताया गया मोक्षदायनी बताया गया वहां का तो गंगाजल भी नहीं लाया जाता है ना तो ये वो स्थान है जहां पे आपके जो परिजन हैं उनको मुक्ति का द्वार मिले हम इसलिए यह मुख्य स्थान बताए गए हैं हमारे शास्त्रों में ओके हर एक का

अर्थ होता है निरर्थक कुछ भी नहीं बताया गया है ठीक है गया में भी ठीक है हरिद्वार मोक्ष दायनी गंगा कौन लाए थे राजा भगीरथ तपस्या करके ठीक है अपने पितरों को उन्होंने कहां से मुक्ति दी माता गंगा से दी फिर वो जहांजहां गए गंगा मैया साथ-साथ ले गए जी ठीक है तो ये वही कारण है जी सर सर आज आपने इतनी अच्छी नॉलेज हम सबके साथ शेयर करी है एंड एंड में आपने जो शराद के बारे में बताया है जो अभी आने भी वाले हैं। सर मुझे बहुत कुछ आज नया सीखने को भी मिला है। एंड मैं ऑडियंस से पूछना चाहती हूं आप कमेंट सेक्शन में जरूर बताना इफ यू वांट पार्ट टू विद सर। एंड थैंक यू सर अपनी नॉलेज शेयर करने के लिए। एंड आज आने के लिए धन्यवाद आपने बुलाया। और मैं यही कहूंगा लोग आपको सुने और अच्छे से और आपका चैनल सब्सक्राइब करके अच्छे कमेंट दें। अगर कुछ बुरा लगा हो तो उसके बारे में भी अगर कोई कमी हो तो वो भी बताएं। जी जी हर हर महादेव। Karnpisachini Brahmarakshah aur

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अघोरी रहस्य Rudra Nath

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